Bikaner Live

प्राचीन सिक्कों और दुर्लभ नोटों की धरोहर की अनमोल झलक देखने मिलेगी – प्रेमरत्न जौहरी
soni

**बीकानेर मुद्रा परिषद: प्राचीन सिक्कों और दुर्लभ नोटों का महत्व, इतिहास और संग्रह**



**बीकानेर, 26 सितंबर:** बीकानेर मुद्रा परिषद के तत्वावधान में आयोजित मुद्रा महोत्सव के प्रथम प्रदर्शनी का आयोजन 22-23 जुलाई 2016 को बीकानेर में हुआ, जिसने क्षेत्र के लोगों और बाहर से आए संग्रहकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। यह प्रदर्शनी प्राचीन सिक्कों और नोटों के महत्व को प्रदर्शित करते हुए राजस्थान के ऐतिहासिक मुद्रा चलन का एक नया आयाम प्रस्तुत करती है। प्रदर्शनी को व्यापक सराहना मिली और लोगों ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आशा जताई।

**प्राचीन सिक्कों का ऐतिहासिक महत्व:**
मुद्रा परिषद के उपाध्यक्ष भरत कोठारी ने बताया कि राजस्थान की रियासतों के पुराने सिक्कों में प्राचीन काल से उर्दू भाषा का उपयोग किया जाता था, क्योंकि उस समय मुगल साम्राज्य का प्रभाव था। मुगलों के शासन के दौरान राजस्थान की रियासतों को भी उर्दू भाषा में सिक्के छापने पड़ते थे। इसके बाद, जब ब्रिटिश काल का आगमन हुआ, तो रियासतों को ब्रिटिश सरकार से अनुमति लेकर हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में सिक्के जारी करने पड़े। इसी दौर में ब्रिटिश साम्राज्य के सिक्के भी प्रचलन में आए, जिनकी मान्यता एक समान थी।

**ब्रिटिश काल और प्रचलित नोट:**
मुद्रा परिषद के सचिव प्रेमरतन सोनी (डांवर) ने बताया कि ब्रिटिश काल के दौरान भारत में विक्टोरिया, एडवर्ड पंचम, और जॉर्ज VI के नाम से कागजी मुद्राएं और सिक्के प्रचलित थे। उस समय के सिक्के और नोट अब दुर्लभ हो चुके हैं और संग्रहकर्ताओं के लिए अत्यधिक मूल्यवान हैं। सोनी का मानना है कि ऐसे नोटों और सिक्कों का संग्रह भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर साबित हो सकता है।

**आजादी के बाद के नोट:**
बीकानेर मुद्रा परिषद के सदस्य नवीन बरड़िया ने बताया कि आजादी के बाद 1948 से 1994 तक 1 रुपये के 59 प्रकार के नोट प्रचलन में आए। यह संग्रह करने योग्य हैं और वर्तमान में इन नोटों को संग्रहकर्ताओं द्वारा अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। इन नोटों के संग्रह से भारतीय मुद्रा इतिहास को गहराई से समझने का अवसर मिलता है।

**राजाओं के सिक्कों का महत्व:**
सदस्य राजीव खजांची ने बताया कि ब्रिटिश काल में कुछ भारतीय राजाओं ने अपने सिक्कों पर अपनी छवि अंकित करवाई थी। इनमें बीकानेर के राजा गंगासिंहजी, भावलपुर स्टेट के महाराज, त्रिपुरा के राजा, इंदौर और ग्वालियर के राजा, बड़ौदा के राजा आदि शामिल थे। लेकिन इसके लिए ब्रिटिश सरकार से विशेष अनुमति लेनी पड़ती थी। इन सिक्कों की ऐतिहासिक और संग्रहणीय महत्व बहुत अधिक है।

**दुर्लभ नंबरों वाले नोटों का संग्रह:**
शैलेन्द्र बरड़िया ने जानकारी दी कि वर्तमान में संग्रहकर्ताओं के बीच 000001 और 111111 जैसे विशेष संख्या वाले नोटों का संग्रह एक नया चलन बन गया है। इन दुर्लभ नोटों की श्रंखला अब मिलनी मुश्किल हो गई है, जिससे इनका संग्रह और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

**आगे का मार्ग:**
बीकानेर मुद्रा परिषद के सचिव प्रेमरतन सोनी (डांवर) ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित किया जाएगा, ताकि भारतीय मुद्रा के इतिहास और संस्कृति को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि परिषद का उद्देश्य केवल प्राचीन सिक्कों और नोटों का प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर को नई पीढ़ी के लिए सहेजना और इस दिशा में जागरूकता बढ़ाना है।

**निष्कर्ष:**
मुद्रा महोत्सव जैसे आयोजन न केवल ऐतिहासिक महत्व के सिक्कों और नोटों के प्रति जागरूकता फैलाते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि इन धरोहरों को संरक्षित किया जाए। बीकानेर की जनता और बाहर से आए दर्शकों ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में और अधिक ऐसे आयोजन होने की उम्मीद जताई है।

**बीकानेर मुद्रा परिषद की दूसरी प्रदर्शनी**

**कार्यक्रम विवरण:**

– **दिनांक:** 27 सितंबर 2024, शुक्रवार से 28,29 सितंबर तक
– **प्रदर्शनी उद्घाटन:** सुबह 9:30 बजे 
– **स्थान:** सूरज भवन, रामपुरिया हवेलियों से आगे, आसानियों का चौक, बीकानेर 

इस प्रदर्शनी में प्राचीन सिक्कों, दुर्लभ नोटों और ऐतिहासिक धरोहरों का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। सभी संग्रहकर्ता और इतिहास प्रेमी आमंत्रित हैं।

Picture of Gordhan Soni

Gordhan Soni

खबर

Related Post

error: Content is protected !!