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पाप वृत्तियों से बचे तथा पुण्यों का संचय करें

बीकानेर, 25 अक्टूबर। जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी महाराज के सान्निध्य में गुरुवार को ढढ्ढा चौक के प्रवचन पंडाल में दीपावली व भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस पर उत्तराध्ययन सूत्र की विशेष व्याख्यान चर्चा में बताया कि मनुष्य को पाप वृत्तियों व कृत्यों से बचना चाहिए तथा पुण्यों का संचय करना चाहिए।
बीकानेर के मुनि सम्यक रत्न सागर महाराज ने जैन दर्शन में आठ कर्मों के भेद में दर्शनावरणीय कर्म के अचक्षु दर्शनावरणीय कर्म पर विस्तृत जानकारी दी। जैनाचार्य के विषय का विस्तार करते हुए मुनि संवेग रत्न सागर महाराज ने कहा कि उतराध्यन सूत्र में भगवान महावीर स्वामी की की अंतिम देशना में संसार सागर से पार करने के अद्भुत सूत्र है। उन्होंने कहा कि पुण्यों का संचय देव, गुरु व धर्म के मार्ग पर चलने और पाप कर्मों से बचने से होता है। उन्होंने विभिन्न कथानकों के माध्यम से पाप विपाक, पुण्य पर मार्मिक वर्णन किया।

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दिलीप गुप्ता

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