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नशा नाश का द्वार: नशा मुक्ति का लिया संकल्प।
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नशा नाश का द्वार: नशा मुक्ति का लिया संकल्प।

भीनासर/बीकानेर 15 फरवरी। नशा मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा को दूषित करता है। यह परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास को अवरुद्ध करता है। इसीलिए नशे को नाश का द्वार कहा गया है। यह उद्गार राजकीय महाविद्यालय गंगाशहर में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए तेरापंथ संप्रदाय के उग्र विहारी मुनि श्री कमल मुनि ने व्यक्त किये। आज विद्यार्थी जीवन में जो संस्कार हीनता दिखाई देती है उसके सभी आयामों पर गंभीर और चुटीला प्रहार किया। अश्लील और असभ्य भाषा का प्रयोग, परीक्षा में बढ़ती हुई नकल, जर्दा, खेणी, गुटका, तंबाकू, शराब आदि विभिन्न प्रकार के नशे के सेवन से युवा सच्चे अर्थों में विद्यार्थी ही नहीं रहता। सच्चरित्रता विद्यार्थी जीवन का आभूषण है।

मुनि श्री ने अपने प्रेरणा पाथेय में फरमाया कि वाचना, पृच्छना, परिवर्तना, ध्यान तथा कथन यह सीखने की प्रक्रिया के पांच चरण होते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी को इनका अभ्यास करना चाहिए। मुनि श्री के प्रेरणास्पद उद्बोधन से प्रेरित होकर 10 विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति का संकल्प लिया। इस अवसर पर मुनि प्रबोध कुमार ने भी विद्यार्थियों को प्रेरक उद्बोधन प्रदान किया। प्राचार्य डॉक्टर बबीता जैन ने महाविद्यालय पधारने पर महाविद्यालय परिवार की ओर से मुनि द्वय का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित की। इस प्रकार के प्रेरणा पाथेय विद्यार्थियों के जीवन की दिशा और दशा को बदलने की क्षमता रखते हैं।

✍ प्रकाश सामसुखा

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