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*विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया*
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बीकानेर, 2 अप्रैल। सौर चेतना एवं ऊर्जा विज्ञान शोध संस्थान इकाई सेवा आश्रम में बुधवार को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया गया। जिसमें इस वर्ष की थीम न्यूरोडायवर्सिटी को आगे बढ़ाना और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य पर विशेष अध्यापिका श्रीमती भावना गौड़ ने बताया कि ऑटिज्म के लक्षण हमें बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं, यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। इसमें बच्चों का हाइपर एक्टिव होना ज्यादातर अकेले खेलना लक्षण दिखाई देते हैं। इस दिवस को मनाने का मुख्य कारण ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिसऑर्डर के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर वर्ष 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाने का संकल्प पास किया था। जिसे सभा ने 18 दिसंबर 2007 को अपनाया तभी से हर वर्ष 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता हैं विशेष शिक्षक मनोज कुमावत ने बताया कि यह बच्चे दुनिया को देखने का एक अनोखा चश्मा पहनते हैं। अगर हम थोड़ी समझदारी, धैर्य और प्यार से उन्हें देखें, तो हम भी उस चश्मे से जीवन को देखना सीख सकते हैं। जहां हर चीज में गहराई और मासूम खूबसूरती छुपी होती है। हमें इन्हें केवल सहारा नहीं सम्मान देना होगा है।
इस अवसर पर व्याख्याता रजत सहारण, मनोज कुमावत, विशेष शिक्षक पृथ्वीराज, शशि बाला, लक्ष्मी रावत, गुंजन तंवर, देवेंद्र कुमार वर्मा, सौरभ पाल आदि उपस्थित रहे।

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दिलीप गुप्ता

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