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आज दीपावली निर्णय पर रत्तानि व्यास बगेची में शास्त्र निर्णय के आधार पर
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आज दीपावली निर्णय पर रत्तानि व्यास बगेची में शास्त्र निर्णय के आधार पर चर्चा की गई जिसमें बीकानेर के विद्वानों ने शास्त्र चर्चा की जिसमे पण्डित ज्यो भगवान दास जी व्यापारी जी, ज्यो महेंद्र जी,ज्यो सुशील कुमार जी,आशाराम जी,भिया महाराज, सन्त श्री जी , ज्यो.नितेश एस्ट्रो भा,अविनाश, अरुण जी,पंकज,विजेंद्र जी , विमल जी आदि ने अपने मत रखे जिसमे धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु ओर सात से ज्यादा पंचागों का मत का विचार रखा जिसमे 21 ओक्टुम्बर 2025 को ही शास्त्र सम्मत है और उत्तम है,
धर्मसिंधु खेमराज श्रीकृष्ण दास के पेज no. 177 और धर्मसिंधु चौखम्बा प्रकाशन वाराणसी के पेज no. 215/216 के अनुसार अगर केवल पहले दिन अमावस्या प्रदोष व्यापिनि हो और दूसरे दिन अमावस्या तीन पहर से ज्यादा और और अमावस्या के मान के समय से प्रतिपदा के समय का मान अधिक हो तो दीपावली दूसरे दिन ही मनाई जाएगी इसका सश्लोक मैं आपको प्रेसित कर रहा हूं

पुरुषार्थ चिंतामणौ तु पूर्वत्रैव व्याप्ति रिति पक्षे पर त्रयाम त्रयाधिक व्याप्ति दर्शे दर्शापेक्षया प्रतिपद् वृद्धि सत्वे लक्ष्मीपूजादि कमपि परत्रैवेत्युक्तम् |
|इसका अर्थ यह है कि अगर प्रथम दिन अमावस्या प्रदोष व्यापिनि हो और दूसरे दिन अमावस्या तीन प्रहर से ज्यादा हो और अमावस्या से ज्यादा प्रतिपदा के मान का समय ज्यादा हो तो दीपावली दूसरे दिन ही मनाई जानी चाहिए यानि प्रतिपदा एकम वृद्धिगामिनी हो तो ही यह शर्त लागू होती है तो दूसरे दिन लक्ष्मीपूजा करे |इन शास्त्र के आधार पर यह निर्णय उत्तम ओर शुद्ध है।।

आज दीपावली निर्णय पर रत्तानि व्यास बगेची में शास्त्र निर्णय के आधार पर चर्चा की गई जिसमें बीकानेर के विद्वानों ने शास्त्र चर्चा की जिसमे पण्डित ज्यो भगवान दास जी व्यापारी जी, ज्यो महेंद्र जी,ज्यो सुशील कुमार जी,आशाराम जी,भिया महाराज, सन्त श्री जी , ज्यो.नितेश एस्ट्रो भा,अविनाश, अरुण जी,पंकज,विजेंद्र जी , विमल जी आदि ने अपने मत रखे जिसमे धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु ओर सात से ज्यादा पंचागों का मत का विचार रखा जिसमे 21 ओक्टुम्बर 2025 को ही शास्त्र सम्मत है और उत्तम है,
धर्मसिंधु खेमराज श्रीकृष्ण दास के पेज no. 177 और धर्मसिंधु चौखम्बा प्रकाशन वाराणसी के पेज no. 215/216 के अनुसार अगर केवल पहले दिन अमावस्या प्रदोष व्यापिनि हो और दूसरे दिन अमावस्या तीन पहर से ज्यादा और और अमावस्या के मान के समय से प्रतिपदा के समय का मान अधिक हो तो दीपावली दूसरे दिन ही मनाई जाएगी इसका सश्लोक मैं आपको प्रेसित कर रहा हूं

पुरुषार्थ चिंतामणौ तु पूर्वत्रैव व्याप्ति रिति पक्षे पर त्रयाम त्रयाधिक व्याप्ति दर्शे दर्शापेक्षया प्रतिपद् वृद्धि सत्वे लक्ष्मीपूजादि कमपि परत्रैवेत्युक्तम् |
|इसका अर्थ यह है कि अगर प्रथम दिन अमावस्या प्रदोष व्यापिनि हो और दूसरे दिन अमावस्या तीन प्रहर से ज्यादा हो और अमावस्या से ज्यादा प्रतिपदा के मान का समय ज्यादा हो तो दीपावली दूसरे दिन ही मनाई जानी चाहिए यानि प्रतिपदा एकम वृद्धिगामिनी हो तो ही यह शर्त लागू होती है तो दूसरे दिन लक्ष्मीपूजा करे |इन शास्त्र के आधार पर यह निर्णय उत्तम ओर शुद्ध है।।

आधार पर चर्चा की गई जिसमें बीकानेर के विद्वानों ने शास्त्र चर्चा की जिसमे पण्डित ज्यो भगवान दास जी व्यापारी जी, ज्यो महेंद्र जी,ज्यो  सुशील कुमार जी,आशाराम जी,भिया महाराज, सन्त श्री जी , ज्यो.नितेश एस्ट्रो भा,अविनाश, अरुण जी,पंकज,विजेंद्र जी , विमल जी आदि ने अपने मत रखे जिसमे धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु ओर सात से ज्यादा पंचागों का मत का विचार रखा जिसमे 21 ओक्टुम्बर 2025 को ही शास्त्र सम्मत है और उत्तम है,
धर्मसिंधु खेमराज श्रीकृष्ण दास के पेज no. 177 और धर्मसिंधु चौखम्बा प्रकाशन वाराणसी के पेज no. 215/216 के अनुसार अगर केवल पहले दिन अमावस्या प्रदोष व्यापिनि हो और दूसरे दिन अमावस्या तीन पहर से ज्यादा और और अमावस्या के मान के समय से प्रतिपदा के समय का मान अधिक हो तो दीपावली दूसरे दिन ही मनाई जाएगी इसका सश्लोक मैं आपको प्रेसित कर रहा हूं

पुरुषार्थ चिंतामणौ तु *पूर्वत्रैव व्याप्ति रिति पक्षे पर त्रयाम त्रयाधिक व्याप्ति दर्शे दर्शापेक्षया प्रतिपद् वृद्धि सत्वे लक्ष्मीपूजादि कमपि परत्रैवेत्युक्तम्* |
|इसका अर्थ यह है कि अगर प्रथम दिन अमावस्या प्रदोष व्यापिनि हो और दूसरे दिन अमावस्या तीन प्रहर से ज्यादा  हो और अमावस्या से ज्यादा प्रतिपदा के मान का समय ज्यादा हो तो दीपावली दूसरे दिन ही मनाई जानी चाहिए यानि प्रतिपदा एकम वृद्धिगामिनी हो तो ही यह शर्त लागू होती है तो दूसरे दिन लक्ष्मीपूजा करे |इन शास्त्र के आधार पर यह निर्णय उत्तम ओर शुद्ध है।।

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