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श्रीमद भागवत कथा में कृष्ण – रुक्मणि विवाह धुमधाम से हुआ
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नोखा। यहाँ तहसील परिसर स्थित अरकेश्वर महादेव मंदिर में 11 अक्टूबर से 17 टूर तक आयोजित श्रीमद भागवत कथा के छटे दिन गुरुवार को कथा व्यास विद्वान पंडित ओमप्रकाश महर्षि ने उद्धव गोपी संवाद कंस वध और कृष्ण रूखमणी विवाह आदि प्रसँगो की कथा सुनाई। महाराज ने कहा भजन और भक्ति में दिखावा नहीं करना चाहिए भक्ति सीखनी है तो गोपियों से सीखो । परलोक सुधारने के लिए धर्ममार्ग पर चलना चाहिए। आज के युग में मनुष्य सुबह से शाम तक जीवन से म्रत्यु तक अर्थ पिछे दौड़ रहा है। जबकि मानव जीवन की सार्थकता प्रभु भक्ति में है। गोपियो और मीरा बाई के जीवन दर्शन से भक्ति की शिक्षा ली जा सकती है। श्री कृष्ण रुक्रमणि विवाह विधिविधान से सम्पन्न हुआ। मंदिर के दूसरे भाग से सजीधजी बारात आई। झांकी विशेषज्ञ शिल्पा राठी द्वारा सजाई गई। कृष्ण रुक्मणी विवाह के पात्र बर कृष्ण के रूप में लक्ष्‌मी तोषनीवाल संग वधू रुक्माणी के रूपमें मनिषा तोषनीवाल (दोनो मां बेटी) का विवाह विद्वान पंडित शास्त्री सुरेन्द्र जोशी द्वारा मंत्रोचार के साथ करवाया, इस दौरान कथा स्थल पर आसन के सामने सजे धजे बराती और श्रोता अपने पैरों को रोक नहीं पाए और झुमने लगे। बारात का मिठाई और फलो की प्लेटें से स्वागत किया गया। मुख्य श्रोता यजमान छगनलाल राठी सपत्निक प्रिया राठी और रामकीशन मोदी सपत्निक श्रीमती उषादेवी मोदी (धोदावत) देशनोक वालो ने बारात का स्वागत किया और कृष्ण-रुक्रमणि की आरती उत्तारी कथा व्यासजी द्वारा भी प्रशान्ता व्यक्त की और भजन गायक पंडित प्रेमभास्त्री ने भजनो और तबलावादक मौटू व्यास ने अपनी कलाओ से चार चांद लगा दिया। कथा के दौरान देख रेख करने में और आर्थिक सह‌योग जुटाने में मंदिर व्यवस्थापक लालचन्द्र उपाध्याय और माहेश्वरी समाज के उमेश राठी का विशेष सह‌योग रहता है।

*कृष्ण रूखमणी विवाह पात्र मां बेटी*
नोखा। अर्केश्वर महादेव मंदिर में आयोजित हो रही भागवत कथा में छटे दिन गुरुवार को कृष्ण के रूप में लक्ष्मी तोषनीवाल माँ और रुक्मणि के रूप में मनिशा तोषनीवाल (बेटी) दोनो मां बेटी का विवाह हुआ जो सचमुच नहीं बल्कि भगवत काथा में कृष्ण सुखमनी में विवाह प्रसँग को सार्थक बनाने के लिये किया गया है।

*श्रीमद भागवत कथा के दौरान बंदर के रूप में हनुमान जी पधारें।*

नोखा श्री अरर्केश्वर महादेव मंदिर में 11 से 17 अक्टूबर तक आयोजित हो रही श्रीमद भागवत कथा के छटे दिन भगवान के विवाह प्रसंग (कृष्ण- रुकमणि) के दौरान मंदिर में हनुमानजी के रूप में बंदर जोड़े सहित आया । मंदिर व्यवस्थापक लालचन्द उपाध्याय ने उन्हें खाने को केले दिये और हाथ जोड़ कर नमन किया इस दौरान अरकेश्वर महादेव परिवार के इन्द्रचन्द मोदी भोर उमेश राठी सहित अनेको भक्तो ने दर्शन किया। मंदिर के लालचन्द उपाध्याय ने अच्छे सगुन होना बताया।
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Gordhan Soni

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