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रैन-बसेरे में श्री विशोकानंद भारती का हुआ अभिनंदन, सेवा व समर्पण को बताया श्रेष्ठ मानवता
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स्व. जगदीश प्रसाद सोनी की स्मृति में हुए सेवाकार्य, आरती व प्रसादी वितरण का हुआ आयोजन
बीकानेर। पीडि़तों की सेवा करना ही मानव धर्म है और विशेष रूप से जरुरत के समय की गई सेवा ही श्रेष्ठ सेवा है। यह उद्गार राजगुरु महामंडलेश्वर स्वामी श्री विशोकानन्द जी भारती ने पीबीएम परिसर में स्थित कैंसर पीडि़तों के रैन-बसेरे में व्यक्त किए। एडवोकेट डॉ. मोहनलाल जाजड़ा ने बताया कि महामंडलेश्वर स्वामी श्री विशोकानंदजी भारती के दीक्षा के पचास वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन किया गया। श्यामसुंदर सोनी ने बताया कि स्व. जगदीश प्रसाद सोनी तोसावड़ रासीसर वाले हाल बीकानेर गोगागेट निवासी की स्मृति में भोजन-प्रसादी का आयोजन किया गया। स्व. जगदीश प्रसाद तोसावड़ धर्मानुरागी व्यक्तित्व के धनी थे और सेवा कार्यों को सदैव प्राथमिकता देते थे। संजय लावट ने बताया कि रैन-बसेरे में लगभग 300 से अधिक उपस्थितजनों ने पहले आरती की और फिर उसके बाद भोजन प्रसादी का वितरण किया गया। भैरुलाल मौसूण ने बताया कि कार्यक्रम में कपिल देव, जुगलकिशोर तोसावड़, रमेश तोसावड़, इन्द्रजीत तोसावड़, कोमल, कंचन देवी, संगीता देवी, बसंती देवी, ममता, जयश्री, मनोज डांवर, आनन्द बूटण, राजकमल जोड़ा, देवकिशन सिंधवालिया, श्रीकिसन डांवर, माधव, मिष्टी, लक्ष्मीनारायण, कोमल, आशीष, विश्वास, प्रिंसी, कृष्णा, प्रिया, भाविका, दृष्टि, विराट, प्रार्थना, क्रिस्टल, जीवा, शिवम ने सेवा कार्य किए।

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Gordhan Soni

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