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विश्व रोगाणुरोधी प्रतिरोध जागरूकता सप्ताह 2025 के तहत रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर कार्यशाला आयोजित
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बीकानेर, 19नवंबर 2025:
विश्व रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) जागरूकता सप्ताह 2025 (18–24 नवंबर) के शुभारंभ के अवसर पर ICAR-INFAAR परियोजना के तहत पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय (राजुवास), बीकानेर के पशु चिकित्सा सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग, में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पशु चिकित्सकों को रोगाणुरोधी प्रतिरोध के बढ़ते खतरे, एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग तथा प्रयोगशाला आधारित निदान के महत्व से जागरूक करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुमंत व्यास, कुलगुरु, राजुवास रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. बी.एन. श्रींगी (निदेशक अनुसंधान, राजुवास) तथा डॉ. संजय शर्मा (अतिरिक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बीकानेर) उपस्थित रहे। कार्यशाला में बीकानेर के कुल 26 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजेश सिंघाटिया (प्रधान अन्वेषक, ICAR-INFAAR परियोजना) द्वारा स्वागत वक्तव्य के साथ किया गया। उन्होंने विश्व रोगाणुरोधी प्रतिरोध जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने एएमआर को बढ़ावा देने वाले कारणों, प्रयोगशाला निदान की अनिवार्यता, सही खुराक निर्धारण तथा वैज्ञानिक आधार पर उपचार चयन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।

डॉ. बी.एन. श्रींगी ने अपने संबोधन में एंटीबायोटिक के अनावश्यक एवं अत्यधिक उपयोग को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. संजय शर्मा ने सभी प्रतिभागी पशु चिकित्सकों को सक्रिय रूप से सीखने और जिम्मेदार एंटीमाइक्रोबियल उपयोग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. फेमिना अंजुम द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. राम कुमार ने प्रस्तुत किया।

कार्यशाला के दौरान कुल चार विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए, जिनमें डॉ. तरूणा स्वामी (विभागाध्यक्ष, सूक्ष्मजीव विज्ञान, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज), डॉ. राजेश सिंघाटिया, डॉ. दिवाकर तथा डॉ. राम कुमार ने अपने-अपने विषयों पर महत्वपूर्ण वक्तव्य दिए। इसके अतिरिक्त एक प्रायोगिक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. दिवाकर, डॉ. राम कुमार तथा डॉ. फेमिना अंजुम ने प्रतिभागियों को रोगाणुरोधी प्रतिरोध निदान एवं परीक्षण की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का समापन प्रमाण-पत्र वितरण तथा प्रतिभागियों के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ जिसमें सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग को बढ़ावा देने और रोगाणुरोधी प्रतिरोध की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने का वचन दिया।

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Gordhan Soni

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