श्री मद भागवत कथा का आज हुआ विराम
बीकानेर/ गंगाशहर रोड स्थित शिव वेली के पास अग्रवाल भवन चल रही 9 दिवसीय श्री मद भागवत कथा का आज विराम हुआ ।
कथा का वाचन श्रीबालाजी सेवा धाम, श्रीबालाजी (नागौर) के पीठाधीश्वर अनन्त विभूषित महामंडलेश्वर आचार्य श्री बजरंग दास जी महाराज द्वारा किया गया। आचार्य श्री बजरंग दास महाराज अपनी अमृतमयी, संगीतमय और भावपूर्ण वाणी से श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत के दिव्य प्रसंगों का रसपान कराया । आयोजकों ने बताया कि कथा के माध्यम से ज्ञान,भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित हुई, जिससे श्रद्धालुओं के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ।
आचार्य बजरंग दास जी महाराज श्रीबालाजी वाले के मुखारविंद से 8 दिनों तक संगीत मय कथा से भक्ति आनन्द मय वातावरण का सरोबार हो गया ।
कथा में बीकानेर विधायक जेठानंद व्यास,सिद्धि बाईसा,संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा,भाजपा शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड,भाजपा देहात अध्यक्ष श्याम पंचारिया,मेढ़ क्षत्रिय सोनी ट्रस्ट भवन के अध्यक्ष गणेशलाल सहदेव,भाजपा नेता शिव शंकर सोनी,एडवोकेट विनोद शर्मा,आदि कई गणमान्यों की उपस्थिति रहीं।
आयोजक मौषुण परिवार चरखड़ा एम एल ग्रुप के महावीर सोनी ने बताया कि 15 जनवरी गुरुवार को कथा स्थल पर ही सुबह 10 बजे यज्ञ से पूर्णाआहुति होगी ।
उसके बाद महाप्रसाद का भोग लगेगा ओर भक्तों को प्रसाद खिलाया जाएगा।
आज की कथा में बजरंग दास जी महाराज ने बताया कि भगवान भाव के भूखे हैं,प्रेम शब्द को बदनाम मत करो अगर प्रेम का अर्थ समझना है तो गोपी प्रेम से समझ सकते हैं, भगवान बिना प्रेम से नहीं मिल सकते
बिना प्रेम रीज़न नहीं नटवर नंदकिशोर , जीवन पूर्ण हो जाता है लेकिन भागवत पुराण कभी पूर्ण नहीं होती है श्रीमद् भागवत के 19 अध्याय हैं और पंचम स्कंध में राजनीति की बातें आती है स्कंध में नौ प्रकार की भक्ति प्रहलाद जी ने बताई है ,दशम स्कंध में 90 अध्याय हैं जिसमें भगवान की लीलाएं हैं ।
कथा स्थल पर शिवजी कलाकार जी ने मैया में माटी नहीं खाई भजन सुनाया तो सभी भाव विभुर हो गए कई आंखे मिच कर भगवान के बाल लीला में खो गए तो कई उत्साहित होकर नाचने लगे ।
बजरंग दास जी महाराज ने कहा कि कथाएं कभी पूर्ण नहीं होती विराम होती है । धन्य है वह लोग जो धन का सदुपयोग करके कथा का आनंद लेते हैं। आखिर में कथा को मोहनलाल जी,दुर्गा देवी अपने सर पर रख कर भव्य शोभायात्रा गाजे बाजे के साथ गंगाशहर के ठाकुर जी के मंदिर में पहुंचाई ।




















































