

बीकानेर।महायोगी अवधूत संत श्री श्री 1008 श्री पूर्णानन्दजी महाराज की 60 वीं पुण्यतिथि पर 12 मार्च से 20 मार्च तक श्री बंशीलाल राठी की बगीची, भीनासर स्थित समाधि स्थल पर चल रही नानीबाई रो मायरो (संगीतमय भक्त माल कथा)में महंत रामप्रसाद महाराज ने कहा कि यह संसार सीधे और सरल लोगों का कम और कूटनीति करने वालों का ज्यादा है। यहां सीधे और सरल व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है, पैसे से गरीब व्यक्ति को कुछ लोग हेय दृष्टि से भी देखते हैं, उनका मान-सम्मान भी नहीं करते हैं। यह हमें नानी बाई के मायरे की कथा में देखने को मिलता है। जब नरसी मेहता अपनी बेटी नानी के यहां उसके ससुराल पहुंचते हैं और संदेशा भिजवाते हैं तब नानीबाई को इसकी जानकारी तक नहीं देते और नरसी मेहता को बड़े इंतजार के बाद मायरे की एक बड़ी सारी पर्ची देकर भेज देते हैं। प्रभु की भक्ति में लीन रहने वाले एक तरह से अपमान का घूंट पीकर चुपचाप वहां से चले जाते हैं और कोई सुनने वाला तो होता नहीं, अपनी अरदास भगवान श्रीकृष्ण से लगाते हैं। साथ ही कहा कि जब आपकी फरियाद कोई नहीं सुनता तब यह ध्यान रखो कि ऊपर बैठा वो सब देख भी रहा होता है और सुन भी रहा होता है। इसलिए उस पर भरोसा रखो, जैसे नरसी मेहता रखते थे। उन्होंने वह पर्ची उसी वक्त भगवान को समर्पित कर दी और स्वयं भगवान की भक्ति में लीन हो गए, जैसे कुछ हुआ ही ना हो!, इसलिए आप पर भी कभी संकट आए तब घबराएं नहीं, सीधे भगवान की शरण में जाएं, वहीं जरिया बनाएगा और आपके आड़े आएगा।
कार्यक्रम संयोजक गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि सेठ बंशीलाल जी की बगीची, मुरली मनोहर मैदान भीनासर में कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं व पुरुषों का आगमन हो रहा है। कथा श्रवण करने वालों के लिए गर्मी को देखते हुए शीतल जल, छायां के लिए टैंट और आने जाने के लिए साधन उपलब्ध करवाए गए हैं। साथ ही बताया कि नित्य क्रम में हवन, पूजन और जागरण का आयोजन किया जा रहा है। १६ मार्च को नारायण बिहाणी बापजी महाराज के समधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे।





















