

बीकानेर । भगवान और भक्त का बड़ा गहरा संबंध है। नरसी मेहता के पुकार पर उस समय भगवान श्री कृष्ण ने भक्त की लाज रखते हुए पूरा 56 करोड़ का मायरा भरा। जिसने भी सुना चकित रह गया। नानीबाई के ससुराल में जब पता चला कि नरसी मेहता भात भरने आ रहे हैं, उनके मुंह खुले के खुले रह गए। उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि नरसी मेहता इतना बड़ा मायरा भर देगा कि आने वाली सदियों तक याद रखने वाला मायरा बन जाएगा।
वहीं जब मायरा भरने की खबर नानी बाई तक पहुंची, उसके नैन भर आए। चहुं और चर्चा थी तो बस नानी बाई के मायरे की और यह चर्चा इसलिए थी कि भगवान स्वयं भक्त के दुख दूर करने के लिए भक्त की पुकार पर मायरा लेकर पहुंच गए। इसलिए भगवान पर भरोसा करने वालों को दुनिया पर भरोसा करने की जरुरत ही नहीं पड़ती। वह मार्ग बना भी देता है और बता भी देता है। यह उद्गार कथा व्यास परम पूज्य परमहंस महंत डॉ. रामप्रसाद महाराज ने नानीबाई रो मायरो (संगीतमय भक्त माल कथा)का वाचन करते हुए व्यक्त किए। महायोगी अवधूत संत श्री श्री १००८ श्री पूर्णानन्द महाराज की ६० वीं पुण्यतिथि पर १२ मार्च से २० मार्च तक श्री बंशीलाल राठी की बगीची, भीनासर स्थित समाधि स्थल पर आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम में संगीतमय भक्तमाल कथा का वाचन किया जा रहा है। गुरुवार को नानी बाई के मायरा भरे जाने का विस्तृत विवेचन किया गया। इस दौरान कथा श्रवण करने वालों की आंखे नम हो गई और हद्धय भर आया। महाराज ने कहा कि जो भी होता है, अच्छे के लिए होता है और नरसी मेहता के साथ भी यही हुआ। नानी के ससुराल वाले जो कभी पैसों का घमंड कर रहे थे, नतमस्तक हो गए।
आयोजनकर्ता समिति के गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि इस कार्यक्रम श्री श्री 1008 अवधूत श्री चन्दन देव जी महाराज एवं अवधूत आश्रम ऋषिकेश के शास्त्री श्री रघुवरदयाल के शिष्य, श्री कृष्णानंद सरस्वती काशी से और मुरली मनोहर धोरा, भीनासर से संत श्री श्यामसुंदर महाराज भी पधारे और भक्तों को धर्मज्ञान से लाभान्वित किया। गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि शुक्रवार 20 मार्च दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक बरसी पूजन एवं भण्डारा का आयोजन किया जाएगा।














