

बीकानेर। प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “सेवा परमो धर्म संस्था, बीकानेर” द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बधिर, बीछवाल, बीकानेर में गौरैया दिवस बड़े उत्साह और प्रेरणादायक माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर संस्था के सदस्यों, विद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों ने मिलकर गौरैया संरक्षण का संदेश दिया तथा पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में गौरैया के लिए 10 घोंसले (घर) लगाए गए, ताकि इन नन्हे पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। इसके साथ ही 10 चुग्गा पात्र (फीडर) भी लगाए गए, जिनमें नियमित रूप से दाना-पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त 15 पालसियों का भी किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गौरैया जैसे छोटे पक्षियों की घटती संख्या को रोकना और उनके संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना रहा।
कार्यक्रम में संस्था के श्रवण (रवि) कुकरा, अशोक कुमार सोनी (डांवर), राजेश कुंदन, अशोक सँवाल, माणक लाल सुथार द्वारका प्रसाद सोनी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर विद्यालय परिसर में घोंसले लगाने, चुग्गा पात्र स्थापित करने और पौधारोपण जैसे कार्यों को अंजाम दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को गौरैया और अन्य पक्षियों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उन्हें इनके संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
संस्था के अध्यक्ष राजेश कुंदन ने कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी चहचहाहट हमारे जीवन में खुशियां और सुकून लाती है। उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि “आइए, हम सभी मिलकर पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों की रक्षा का संकल्प लें और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ इन नन्हे जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करें।”
संस्था के श्रवण (रवि) कुकरा ने कहा कि गौरैया का संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी है। जिस प्रकार पहले हमारे घरों के आंगन में गौरैया की चहचहाहट सुनाई देती थी, वह अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है, जो चिंता का विषय है।”
संस्था के सचिव अशोक कुमार सोनी (डांवर) कहा कि “सेवा परमो धर्म संस्था का उद्देश्य केवल सेवा कार्य करना ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। इसी कड़ी में गौरैया दिवस के अवसर पर यह पहल की गई है, ताकि नई पीढ़ी को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।” उन्होंने कहा कि “यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में एक घोंसला और दाना-पानी की व्यवस्था कर दे, तो गौरैया की संख्या में निश्चित रूप से वृद्धि हो सकती है। यह एक छोटा प्रयास है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है।”
अशोक सँवाल ने कहा कि गौरैया का संरक्षण करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
माणक लाल सुथार ने कहा कि यदि समाज के हर व्यक्ति द्वारा इस दिशा में छोटे-छोटे प्रयास किए जाएं, तो गौरैया की संख्या में फिर से वृद्धि संभव है।
संस्था के द्वारका प्रसाद सोनी पत्रकार ने बताया कि गौरैया, जो कभी हमारे घरों और आंगनों की आम मेहमान हुआ करती थी, आज तेजी से विलुप्ति की कगार पर पहुंच रही है। इसके पीछे शहरीकरण, पेड़ों की कटाई, मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें और बदलता पर्यावरण प्रमुख कारण हैं। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व बनता है कि वह इन पक्षियों के संरक्षण के लिए छोटे-छोटे प्रयास करे, जैसे घरों में घोंसले लगाना, दाना-पानी रखना और पेड़-पौधों का संरक्षण करना।
विद्यालय की प्राचार्या रेणु वर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि गौरैया दिवस मनाने का उद्देश्य केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में भी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने का प्रयास करें।
उप प्राचार्य उम्मेद सिंह और रोहित आचार्य ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में समझाया और बताया कि यदि हम आज प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने दैनिक जीवन में ऐसे कार्य करें, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे।
इस अवसर पर विद्यालय के रेणुका स्वामी, प्रेमलता श्रीमाली, सरस्वती पुरोहित, सुनीता गुलाटी, रेखा गौड़ आदि उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने घोंसले और चुग्गा पात्र लगाने में सक्रीय सहयोग किया। विद्यार्थियों में इस कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपने घरों और मोहल्लों में भी गौरैया के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करेंगे और लोगों को इसके लिए प्रेरित करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से संकल्प लिया। उन्होंने यह भी तय किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सके।
गौरैया दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों और समाज के अन्य लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ। “सेवा परमो धर्म संस्था, बीकानेर” की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है और इससे समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।














