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कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि-सुमिरि नर उतरे पारा

“कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि-सुमिरि नर उतरे पारा”गोपेश्वर बस्ती स्थित शिव-पार्वती मंदिर, माली समाज भवन में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लिया।कथावाचक पंडित गिरिराज जोशी ने अपने प्रवचन में कहा कि कलियुग के प्रभावों से बचने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय भगवान के नाम का कीर्तन एवं निरंतर स्मरण है। उन्होंने बताया कि भगवान के नाम का सुमिरन मनुष्य को सांसारिक कष्टों से पार लगाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।आज की कथा में श्री सुखदेव जी के पूजन, राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा श्रवण, कपिल आख्यान, भगवान वराह अवतार तथा शिव-पार्वती विवाह के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। शिव-पार्वती विवाह की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।विवाह प्रसंग में परिणीति ओझा ने माता पार्वती तथा मुस्कान जोशी ने भगवान शिव का स्वरूप धारण कर सुंदर प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित भक्तों ने खूब सराहा।कथा के दौरान भजन-कीर्तन एवं धार्मिक वातावरण से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की।

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