
वरिष्ठ से युवा तक सभी ने जाना भविष्य की पत्रकारिता का रास्ता
बीकानेर। आज के बदलते मीडिया परिदृश्य में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल मीडिया तेजी से पत्रकारिता की दुनिया को नया रूप दे रहे हैं, वहीं बीकानेर के पत्रकार भी इस बदलाव से कदम मिलाने के लिए तैयार नजर आए। नोखा रोड स्थित बाफना स्कूल में रविवार को बीकानेर प्रेस क्लब द्वारा एआई एवं डिजिटल मीडिया पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने समान उत्साह के साथ भाग लिया।
चार घंटे तक चली ज्ञानवर्धक कार्यशाला
करीब चार घंटे तक लगातार चली इस कार्यशाला में मोदी यूनिवर्सिटी के संयुक्त डीन राहुल सिंह शेखावत ने पत्रकार साथियों को डिजिटल पत्रकारिता के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने निम्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी —
डिजिटल मीडिया का महत्व और आज के दौर में इसकी अनिवार्यता
गैप एनालिसिस — यानी आपके न्यूज पोर्टल में क्या कमी है और उसे कैसे दूर करें
कंटेंट स्ट्रेटजी — किस तरह का कंटेंट पाठकों को जोड़ता है
एआई आधारित टूल्स और उनका व्यावहारिक उपयोग
गूगल एल्गोरिद्म की कार्यप्रणाली और उससे फायदा उठाने के तरीके
हिंदी फर्स्ट रणनीति — हिंदी पाठकों तक प्रभावी पहुंच कैसे बनाएं
एआई टूल स्टैक, गूगल एनालिटिक्स, ऑडियंस इनसाइट्स और कैंपेन ट्रैकिंग
न्यूज पोर्टल की ब्रांडिंग, लेआउट फोकस और पाठक की लाइफटाइम वेल्यू
गूगल कीवर्ड प्लानर से अपनी ऑडियंस को बेहतर समझने की तकनीक
71 वर्षीय पत्रकार की उपस्थिति बनी प्रेरणा
कार्यशाला की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि 71 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पुगलिया ने न केवल कार्यशाला में शिरकत की बल्कि नई तकनीक को सीखने का उत्साह भी प्रदर्शित किया। उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और पत्रकारिता में अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय ही आगे की राह है।
मंचासीन रहे वरिष्ठ पत्रकार
कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पुगलिया, जैन लूणकरन छाजेड़, मोहन थानवी, राजीव हर्ष एवं नीरज जोशी मंचासीन रहे। प्रेस क्लब अध्यक्ष कुशाल सिंह मेड़तिया, महासचिव विशाल स्वामी, कोषाध्यक्ष गिरिराज भादाणी, पूर्व अध्यक्ष जयनारायण बिस्सा और पूर्व अध्यक्ष अनुराग हर्ष सहित अनेक पत्रकारों ने राहुल सिंह शेखावत को स्मृति चिह्न व साफा पहनाकर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन बलदेव रंगा ने किया। पत्रकार साथियों ने बाफना स्कूल के सीईओ डॉ. पी.एस. वोहरा का भी हार्दिक आभार व्यक्त किया।
पत्रकारिता में एआई के उपयोग से क्या-क्या फायदे?
आज की पत्रकारिता में एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक बन चुका है। आइए जानते हैं कि एआई अपनाने से पत्रकारों को किस तरह के फायदे मिलते हैं —
समय की बचत और तेज रिपोर्टिंग
एआई टूल्स की मदद से घंटों का काम मिनटों में हो जाता है। डेटा विश्लेषण, ट्रांसक्रिप्शन और बेसिक ड्राफ्टिंग जैसे काम एआई बड़ी तेजी से करता है, जिससे पत्रकार असली खबर खोजने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
फेक न्यूज और फैक्ट चेकिंग
एआई आधारित फैक्ट-चेकिंग टूल्स किसी भी खबर की सत्यता को तेजी से परखने में मदद करते हैं, जिससे गलत सूचनाओं पर लगाम लगती है और पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहती है।
एसईओ और डिजिटल पहुंच
गूगल कीवर्ड प्लानर और एआई कंटेंट टूल्स से खबरें सही दर्शकों तक पहुंचती हैं। सही कीवर्ड और हेडलाइन से न्यूज पोर्टल की गूगल रैंकिंग बेहतर होती है।
ऑडियंस एनालिसिस
एआई बताता है कि आपके पाठक कौन हैं, वे क्या पढ़ना पसंद करते हैं और किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं — इससे कंटेंट को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
मल्टीमीडिया कंटेंट निर्माण
वीडियो एडिटिंग, इन्फोग्राफिक्स, वॉइसओवर और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार करने में एआई टूल्स अब पत्रकारों के सबसे बड़े सहायक बन चुके हैं।
स्थानीय भाषाओं में पत्रकारिता
हिंदी फर्स्ट रणनीति और एआई ट्रांसलेशन टूल्स से स्थानीय भाषा में गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करना अब बहुत आसान हो गया है।
बीकानेर प्रेस क्लब की यह कार्यशाला इस बात का संकेत है कि बीकानेर के पत्रकार अब डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। तकनीक और अनुभव का यह संगम पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।















