गुरु के प्रति आदर और जीवन मूल्यों का बोध ही शिक्षा का उद्देश्य : प्रो. दिग्विजय सिंह शेखावत
बीकानेर, 3 अगस्त। राजकीय विधि स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को गुरु वंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर दिग्विजय सिंह शेखावत ने गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रकाश डालते हुए गुरु पूर्णिमा के महत्व को जीवंत एवं प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि जब तक गुरु जीवन मूल्यों का बोध नहीं कराता, तब तक व्यक्ति का जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है तथा व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि गुरुतत्त्व का वास्तविक अर्थ व्यक्ति को पशुता से मनुष्यता की ओर अग्रसर करना है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. भगवाना राम विश्नोई ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में चेतना, संस्कार और जीवन मूल्यों का विकास करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान के प्रति सदैव जिज्ञासु रहने तथा जीवन के प्रत्येक चरण में गुरु के प्रति सम्मान एवं सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर नई किरण नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत विशेष व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। प्रोफेसर दिग्विजय सिंह शेखावत ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं संक्षिप्त रूपरेखा हेम सिंह शेखावत ने प्रस्तुत की, जबकि प्रो. कुमुद जैन ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।














