बीकानेर, 17 अगस्त। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य प्रवर 1008 रामलालजी म.सा.,व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास (समर्पण महोत्सव-2026 ) के तहत छबीली घाटी के सेवा सदन में सोमवार को श्राविकाओं का महिला मंडल के तत्वावधान में 7 दिवसीय ’’अब नहीं तो फिर कब’’ कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला नियमित दोपहर दो बजे से सवा तीन बजे तक मुनि व साध्वी वृंद के सानिध्य में चलेगी।
साधुमार्गी महिला मंडल अध्यक्ष ललिता बांठिया ने बताया कि प्रथम दिन ’’ऐसी वाणी बोलिए’’ व ’जैन साधु-साध्वी को गोचरी बहराने (देने) विषय पर व्याख्यान हुआ। मंगलवार को ’’ ऑल इन वैल’’, बुधवार को श्रेष्ठ मुर्हूत, 20 अगस्त को गिनीज बुक ऑफ साधुमार्गी, 21 अगस्त को ’’अहो दनाम’’, व 22 अगस्त को ’’एक गिलास ज्यूस’’ विषय पर व्याख्यान एवं चर्चा होगी। जीवन को नई दिशा देने के लिए आयोजित कार्यशाला में श्राविकाएं उत्साह से हिस्सा ले रही है।
प्रथम दिन मधुर मुनि ने कहा कि मधुर विनम्र वचनों (वाणी) के महत्व को समझाते हुए कहा कि मनुष्य को अहंकार या स्वार्थ रहित ऐसी मीठी भाषा या वाणी का उपयोग करना चाहिए जिससे सुनने वाले के मन को ठंडक और शांति मिले तथा स्वयं बोलने वाले को भी आंतरिक प्रसन्नता महसूस हो। हमें बोलते समय अपने मन का बड़प्पन या घमंड त्याग कर बोलना चाहिए। मीठे वचन सुनने वाले दिन को राहत और खुशी देते है, जब हम, धीरे,कम और मीठा बोलते है तो हमें तनाव व क्लेश से छुटकारा तथा मन में शांति मिलती है।
मधुर मुनि महाराज ने बताया कि जैन धर्म में साधु संतों की भोजन करने की चर्या या भिक्षा मांगने की विधि को ’’गोचरी’’ कहा जाता है। जैन साधु-साध्वी बिना किसी पर भार डाले या अहिंसा का पालन करते हुए थोडा-थोड़ा भोजन कई घरों से भीक्षा के रूप् में लेते है। साधु-साध्वी गोचरी के समय 42 दोषों का त्याग (ऐसा भोजन जो उनके लिए विशेष रूप् से बनाया गया हो, या जिसमें किसी जीव को कष्ट हुआ हो) पूरी तरह ध्यान में रखते है और उसे त्यागते है। साधु-साध्वी भोजन का स्वाद नहीं देखते और नहीं किसी भोजन की इच्छा या आग्रह करते है, जो मिल जाए उसे संयम से स्वीकार करते है। गोचरी इस तरह ली जाती है कि किसी गृहस्थ को असुविधा नहीं और और हिसी प्रकार की जीव हिस्सा नहीं हो। उन्होंने उपस्थित लगभग 150 श्राविकाओं को जैन साधु-साध्वी को गोचरी बहराने के नियम कायदों के पालन करने का संकल्प दिलवाया।









