
नोखा । यहाँ लाहोटी चौक वीर हनुमान मंदिर के समीप अयोध्या धाम में चातुर्मास सत्संग समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से 20 अक्टूबर तक आयोजित हो रहे भव्य चातुर्मास महोत्सव के पावन अवसर पर श्री वाल्मीकि रामायण कथा एवं विशेष शारदीय नवरात्र में शतमुख कोटि होमात्मक अयुत चंडी महा यज्ञ एवं नवरात्रि में सामूहिक रामायण पाठ का भव्य एवं दिव्य आयोजन कथा व्यास अनन्त श्री विभूषित परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज (वृंदावन) के सानिध्य में ही चल रहा है। 29 जुलाई से सांय 4 बजे से 6 बजे तक परम पूज्य ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज (दंडी स्वामी) के श्रीमुख से हो रही श्री वाल्मीकि कथा के 33 वें दिन रविवार 30 अगस्त को महाराज ने पांडाल में बड़ी तादाद में उपस्थित नर नारी श्रोताओं वाल्मिकी रामायण कथा ज्ञान यज्ञ में डुबकियां लगवाते हुए उन्हें भाव विभोर कर दिया। महाराजश्री ने सुन्दर काण्ड से आगे बढ़ते हुए लंका काण्ड व हनुमानजी द्वारा माता सीता को खोजने समुन्दर पार कर लंका जाना वहाँ माता सीता नहीं पाना तो चिंता करने लगे लेकिन पवन पुत्र हनुमान ने कहा पुरी लंका, पाताल लोक, स्वर्ग लोक सभी जगह जाकर माता सीता का पता लगाने में कोई कमी नहीं रखते आज की कथा तक माता सीता का पता नहीं चला। हनुमानजी ने कहा माता सीता नहीं मिली तब तक वापस नहीं जाऊंगा। महाराजश्री ने श्रोताओं से, स्वामी विवेकानंदजी की जापान की घटना बताते हुए एक जापानी द्वारा विवेकानंदजी की मदद करने की बात पर कहा कि जापानी से पूछ जाने पर अपने देश के सम्मान की बात कही उसी प्रकार हनुमानजी को लंका में एक भी नहीं मिला जो अपने देश की बुराई करे लेकिन भारत में ऐसा नहीं है वो विदेश जाकर भारत को बदनाम कर रहे हैं। महाराज ने कहा भगवान अपने भक्तों की रक्षा हेतु मनोकामना सिद्ध करते हैं। समिति के मीडिया प्रभारी इन्द्रचंद मोदी ने बताया कि कथा के दौरान पांडाल भरा हुआ था। समिति के प्रहलाद मोहता, दामोदर तिवाड़ी, गिरधारी पारीक, गोपाल मोहता, जुगल लोहिया, नारायण राठी, बाबूलाल चांडक, रमेश मालाणी आदि व्यवस्थाओं पर नजर रखे हैं।












