



नोखा। यहाँ लाहोटी चौक अयोध्या धाम में परम पूज्य दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में 29 जुलाई 2026 से 20 अक्टूबर तक आयोजित हो रहे भव्य चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत रविवार 27 सितम्बर से 3 अक्टूबर दोपहर 2 से सांय 5 बजे तक आयोजित होने वाली सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास विद्वान आचार्य हेमेंद्र शुक्ल महाराज ने प्रथम दिन की कथा प्रारंभ करते हुए श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामकथा जीना सिखाती है और कृष्ण कथा मरना सिखाती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा महापुराण सभी ग्रंथों और वेदों का सार है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष में कथा सुनने से बड़ा पुण्य लाभ मिलता है और पितरों के निमित्त करवाई जा रही कथा से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका कल्याण होता है। भागवत कथा के महात्म्य के 6 अध्यायों को लेकर कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाने के लिए श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में डुबकी लगाकर अपने जीवन का कल्याण करने का मौका मिला है इसका पूरा लाभ उठावें और सातों दिन कथा सुनें।
कथा प्रारंभ करने से पूर्व समीपी वीर हनुमान मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। आयोजक मेघासर हाल नोखा निवासी लक्ष्मीचन्द उपाध्याय सपत्निक श्रीमती धूड़ी देवी के साथ अपने सिर पर श्रीमद् भागवत कथा महापुराण धारण कर व पत्नी कलश लेकर चल रहे थे। इनके इर्द-गिर्द घर-परिवार सहित अनेकों नर-नारी श्रोता चल रहे थे। कथा पांडाल में पहुँचने के बाद व्यासजी का पूजन कर व्यास पीठ पर बिठाया गया।
ज्ञात रहे आयोजक लक्ष्मीचन्द अपने स्व. माता लक्ष्मी देवी पिता भंवरलाल उपाध्याय की स्मृति में भागवत कथा का आयोजन करवाते हुए व्यासपीठ के सामने सपत्निक श्रीमती धूड़ी देवी के संग बैठकर कथा का पान कर रहे हैं। इनके आसपास घर-परिवार के सदस्य दो भाई गोविन्दलाल सपत्निक श्रीमती कुमकुम व मोहनलाल सपत्निक श्रीमती कौशल्या देवी और तीनों पुत्र सुरजमल सपत्निक श्रीमती विजय लक्ष्मी, मेघराज सपत्निक प्रेमलता और तुलसीराम सपत्निक श्रीमती पूनम देवी सहित परिवार के छोटे-मोटे नर-नारी और बच्चों व अनेकों नर-नारी श्रोतागण बैठकर श्रीमद् भागवत कथा का रसास्वादन कर रहे हैं।














