नागौर । अयोध्यापुरी साक्षात् ब्रह्म का ही स्वरूप है ,जिससे यह अयोध्या परमब्रह्म मानी जाती हे , यहां प्रवाहित हो रही सरयु नदी के जल में ब्रह्म का प्रवाह होता है । अयोध्या वासियों को आज भी यहां जुगल सरकार के निवास होने का अहसास होता ।इस धाम में आने वाला कोई भी व्यक्ति यदि एक रात का भी वास कर ले उसे साक्षात् भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है ।
यह उद्बोधन जगतगुरु भगवान श्री रामानुजाचार्य जी ने अयोध्या धाम में आयोजित श्री रामार्पण हनुमंत ग्रन्थ कथा के तृतीय दिवस पर उपस्थित श्रोताओं को न केवल अपना आशीर्वाद ही दिया बल्कि भगवान के भगत की कथा का होना अपने आप में दुर्लभ संयोग भी बताया ।
उन्होंने कहा कि अवध धामाधिपति धाम है ,जिसमें सीताराम जुगल सरकार आज भी निवास करते हे । त्रेता युग में उन्होंने जो लीला दिखाई उसका अहसास आज भी व्यवहारिक तौर पर यहां के प्रत्येक निवासी को होता है ।
भगवान श्री राम के श्री हनुमानजी परम भक्त हैं और वे ही अयोध्या के राजा है ।भगवान की कथा में वे स्वयं विराजमान होकर कथा सुनते हैं वही इस पावन धाम में आयोजित हो रही परम भगत की कथा में श्री राम भगवान को आना ही है । कथा में उपस्थित श्रोताओं के भाग्य की उन्होंने सराहना की और कहा कि अयोध्या धाम में श्री हनुमानजी की कथा का होना अपने आप में दिव्य प्रसंग है ।
उन्होंने कहा कि इस मानुष यौनि को यदि भवसागर से पार कराया जाने का एक मात्र उपाय भक्तों की कथा श्रवण मनोयोग से करे ।उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान की कथा भगतो को अच्छी लगती हे,पर भक्त की कथा भगवान को बहुत ही प्रिय लगती हे ।
इस सुंदर आयोजन में जानकी घाट बड़ा आसन के महंत स्वामी जनमेजयीशरण महाराज ने कहा कि चारों जुग प्रताप तुम्हारा जिस प्रकार हमारे शरीर में जो प्राण का स्थान हे उसी प्रकार श्री हनुमान श्री राम के प्रिय भक्तों में है। हनुमानजी ज्ञानियों में अग्रगन्य जिसका प्रमाण भी उन्होंने युद्ध के लिए लंका जाते समय और अशोक वाटिका एवं लंका दरबार में दे चुके हे ।
अयोध्या धाम में श्री रामार्पण हनुमंत ग्रन्थ कथा जिसे श्री श्याम सुंदर श्यामा के मुखारविन्द से सुनाई गई और रसिक श्रोताओं ने बहुत ही परमानंद में आनंद लेकर इसे सुना ।श्री श्यामा ने इस कथा ग्रन्थ को श्री हनुमानजी की प्रेरणा से 1435 पृष्ठ 42 माह में बारह घंटे तक लेखन कार्य कर इसे तैयार किया ।अयोध्या धाम में यह पहली कथा हे और जन जन तक इस कथा को पहुंचाने का अग्रिम प्रयास किया जा रहा हे ।दूसरी कथा का आयोजन सवाईमाधोपुर के मलारना चौड़ स्थित सियाराम आश्रम में होना यही से तय हो गया जिसके समय का निश्चित जल्द ही किया जाएगा ।इस अद्भुत ग्रंथ का प्रकाशन जयपुर में हो रहा हे जिसके पूर्ण होने पर भव्य आयोजन कर इसका लोकार्पण किया जाएगा ।

















