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जैन साहित्य संगम संस्थान का तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन व जैन कवि सम्मेलन
कवि व साहित्यकार जैन दर्शन, सिद्धान्त व आदर्शों को जन जन तक पहुंचाएं-कटारिया

बीकानेर, 25 सितम्बर। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी महाराज, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के सान्निध्य में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के आतिथ्य में रविवार को गंगाशहर मार्ग के आदिनाथ भवन में जैन साहित्य संगम संस्थान का तीसरा दो दिवसीय अधिवेशन व जैन कवि सम्मेलन में शुरू हुआ।
इस अवसर पर बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास, श्रीडूंगरगढ़ के विधायक ताराचंद, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी, जैन साहित्य संगम संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जेन ’’हर्षदर्शी’, सचिव राजेन्द्र कांठेड़, उपाध्यक्ष विजय सिंह नाहटा, अधिवेशन के राष्ट्रीय संयोजक अशोक नागौरी, कैलाश तरल, जैन सेवा समिति बीकानेर के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, श्रीमती अनीता कटारिया, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के मंत्री सुरेश बच्छावत, अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा, अखिल भारतीय साधुमार्गी महिला संघ की महामंत्री प्रीति डागा, जैन महासभा अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा, पार्श्वचन्द्र गच्छ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया, मंत्री प्रताप रामपुरिया सहित देश के विभिन्न प्रदेशों से आए जैन साहित्यकार व कवि तथा बीकानेर के जैन समाज के गणमान्य श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।
पंजाब के राज्यपाल कटारिया ने  जैन साहित्य संगम संस्थान के दूसरे अधिवेशन की स्मारिका ’’राष्ट्रीय अधिवेशन 2025’’ अनुभूतियों का आकाश का लोकार्पण किया तथा साहित्यकार व कवि विजय सिंह नाहटा को साहित्य के क्षेत्र में बहु आयामी अवदानों की अनुमोदनार्थ ’’ उदयपुर के छंद राज ऊं पारदर्शी की स्मृति में  ’’ऊं पारदर्शी पुरस्कार’’ से सम्मानित किया।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि कवि व साहित्यकार जैन दर्शन व धर्म के आदर्शों, विशिष्टताओं को सकारात्मक सोच के साथ जन-जन तक पहुंचाएं। युवा पीढ़ी के लिए भगवान महावीर , तीर्थंकरों व चारित्र आत्माओं की ओर बताए पांच महाव्रतों सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य व ब्रह्मचर्य व नवकार महामंत्र की विशिष्टताओं को सहज भाषा में छोेंटी पुस्तकों के रूप में तैयार करें। युवा पीढ़ी को  काम,क्रोध, लोभ व मोह आदि कषायों से बचने के लिए साहित्य का सृजन करें।
कटारिया ने कहा कि बीकानेर ज्ञान, साहित्य, कला व संस्कृति, धर्म-आध्यात्म की धरती है। मरु नगर के विद्वानों, चारित्र आत्माओं ने अपने कार्य से जीवन को नई दिशा देने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि कलमकार की ताकत से ही देश में साम्प्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारा तथा धर्म व संस्कृति के आदर्श अक्षुण है। कलमकार वर्तमान के साथ भविष्य को आदर्श बनाने के लिए अपनी कलम से दिशा दें, सच्चा धर्मनिष्ठ, राष्ट्रभक्त इंसान बनाने के लिए प्रेरणा दें।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के पांच महाव्रतों का सिद्धान्त, जैन दर्शन केवल जैन समाज की बपौती नहीं है, यह समूचे दुनियों के जीव मात्र के कल्याण के लिए है। भगवान महावीर ने लोगों की जीवनचर्या को बदलने के लिए तपस्या,साधना तथा कषायों पर विजय प्राप्त की। जैन दर्शन अमन चैन व शांति तथा जीव मात्र के कल्याण तथा जीओं और जीने दो का संदेश देने वाला है। जैन धर्म के पांच महाव्रतों का पालन करने वाले का जीवन श्रेष्ठ बन जाता है । परिवार, समाज में किसी तरह का राग-द्वेष व अहंकार नहीं रहता ।  उन्होंने कहा कि किसी दूसरे को अच्छा बनाने से पहले खुद अच्छा इंसान बनें। जैन दर्शन के सिद्धान्त’’कम खाओ, गम खाओ और नम जाओ’’ तथा ’क्षमापना’’ आदि अनेक सिद्धान्त जीवन को परिवर्तन करने वाले है ।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की पहचान गुणों से होती है। सर्व कल्याणकारी नवंकार महामंत्र में किसी व्यक्ति विशेष की स्तुति वंदना की बजाए अरिहंत, सिद्ध, उपाध्याय, आचार्य व साधु की वंदना की है। साहित्यकार व कवि सर्व समाज को विशेष कर युवा पीढ़ी को नवकार महामंत्र की विशेष्टताओं से अवगत करवाएं। उन्होंने कहा कि जैनाचार्य रामलालजी व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने भावी पीढ़ी को जैन धर्म व संस्कार से जोड़ने तथा व्यसन एवं नशे की प्रवृति के खिलाफ जन चेतना जगाने का अनुकरणीय प्रेरणा दी है। चारित्र आत्माओं की प्रेरणा से सकारात्मक सोच के साथ सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि कोई कानून किसी के व्यसन व नशे की प्रवृति को रोक नहीं सकता, चारित्र आत्माओं की प्रेरणा, परिजनों का सार्थक प्रयास व जन चेतना से ही देश नशा मुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि नशेड़ी की बजाए नशे से नफरत करें। सामाजिक व आम जन चेतना से ही नौजवान पीढ़ी नशा मुक्त बन सकती है।  कवि व साहित्यकार आने वाली पीढ़ी को नशे की प्रवृति से रोकने के लिए अपनी रचनाओं से जगाने प्रयास करें।  भगवान महावीर के अपरिग्रह के सिद्धान्त को धारण करते हुए विवाह व अन्य कार्यों में दिखावे व फिजुल खर्चे से बचें तथा प्राप्त संसाधनों को जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा व संस्कार देने में लगाएं।
विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि जैन शब्द शुद्धता, सात्विकता व अहिंसा व पांच महाव्रतों की प्रेरणा देने वाला है। जैन समाज के रचनाकार व प्रबुद्धजन नशा मुक्त समाज की संरचना में सहभागी बनें। प्रत्येक व्यक्ति नशेड़ी का नशा छुडाने का संकल्प दें। समाज को जुआ, सट्टा व नशा तथा व्यसन से मुक्त करने का सर्वजन सामूहिक प्रयास करें।
श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद ने कहा कि जैन धर्म, सिद्धान्त व दर्शन से सात्विक विचार धारा व देश भक्ति के साथ आत्म चिंतन,आत्म निरीक्षण करते हुए अपने में व्याप्त बुराइयांें को दूर करने की प्रेरणा मिलती है।
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जेन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी ने बताया कि साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य नानालालजी व आचार्य रामलालजी म.सा.की प्रेरणा से 63 वर्षों बलाई अनुसूचित जाति के अनेक लोगों ने नशा व व्यसन की प्रवृति को त्यागकर शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में प्रगति कर रहे है। जैन दर्शन व चारित्र आत्माओं की प्रेरणा से बलाई जाति के 469 गांवों के लोगों के जीवन स्तर में काफी परिवर्तन आया है। उन्हें धर्मपाल का सम्मान देते हुए युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए 150 जैन संस्कार पाठशालाओं का संचालन किया जा रहा है। साधुमार्गी जैन सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने चातुर्मास ’’समर्पण-2026’ की गतिविधियों से अवगत करवाया। जैन साहित्य संगम संस्थान के उपाध्यक्ष विजय सिंह नाहटा ने स्वागत भाषण किया। ’’जैनम जयती शासनम्’’, ’’हर्ष-हर्ष, जय-जय’’ के उद्घोष के साथ चले कार्यक्रम में संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन हर्षदर्शी ने बताया कि संस्थान जिनवाणी को साहित्य एवं काव्य के माध्यम से जन जन तक पहुंचाने, जैन दर्शन और साहित्य में जैन कवि साहित्यकारों के योगदान को उजागर कर जन जागरा को संकल्पित होकर कार्य कर रही है। संस्था साहित्य सृजन की गुणवता व पवित्रता को बनाएं रखते हुए जैन संस्कृति के प्रचार प्रसार, राष्ट्र धर्म के प्रति संकल्पिक होकर जैन सिद्धान्तों का प्रचार प्रसार कर रही है। सचिव राजेन्द्र कांठेड़, उपाध्यक्ष विजय सिंह नाहटा, अधिवेशन के राष्ट्रीय संयोजक अशोक नागौरी  ने विचार व्यक्त किए। वीरेन्द्र आभाणी ने सामूहिक अरिहंत वंदना करवाई।
श्री साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि सोमवार को प्रवचन श्रवण, चारित्र आत्माओं का मार्ग दर्शन, विद्वजन संगोष्ठी, कृतियों का लोकर्पण, रविवार को हुई कविता प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण,विराट कवि सम्मेलन व अधिवेशन का समापन समारोह होगा।  कविता प्रतियोगिता में प्रथम को 5100, द्वितीय को 3100 व तृतीय को 2100 रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। महिला कार्यक्रम संयोजिका मंदसौर की चंदाजी डागा व निर्देशन में महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूव में विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी को आमंत्रित किया है।
चारित्र आत्माओं व दो शताब्दी प्राचीन जिनालय में किए दर्शन
बीकानेर, 27 सितम्बर। पंजाब के राज्यपाल तथा चंड़ीगढ़ के प्रशासक गुलाब कटारिया ने सत्नीक छबीली घाटी के सेवा सदन में साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि सहित अनेक चारित्र आत्माओं के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद लिया।
उन्होंने गंगाशहर मार्ग के आदिनाथ भवन परिसर की पार्श्वचन्द्र दादाबाड़ी के 200 वर्ष प्राचीन भगवान आदिनाथ, पार्श्वचन्द्र गच्छ के संस्थापक आचार्य पार्श्वचन्द्र सूरिश्वरजी व भैरव जी के मंदिर  में दर्शन किए  । श्री जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया तथा मंत्री प्रताप रामपुरिया ने मंदिर के इतिहास व विशिष्टताओं से अवगत करवाया तथा कटारिया का अभिनंदन किया।

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