
बीकानेर। गंगाशहर के नोखा रोड स्थित हंशा गेस्ट हाउस में मंगलवार को जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो) के तत्वावधान में आठ कर्मों पर ध्यान केंद्रित वर्कशॉप आयोजित की गई। वर्कशॉप में समणी निर्वाणप्रज्ञाजी एवं समणी चैतन्यप्रज्ञाजी ने प्रतिभागियों के साथ चिंतन, अध्यात्म और जीवन में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों के समाधान को लेकर संवाद किया।
वर्कशॉप के दौरान आठ कर्मों की अवधारणा, उनके प्रभाव तथा आत्मिक विकास में ध्यान एवं अध्यात्म साधना की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। श्रमणीजी ने बताया कि व्यक्ति के जीवन में अनेक परिस्थितियां उसके कर्मों और मानसिक अवस्था से प्रभावित होती हैं। ऐसे में स्वयं के भीतर झांकना, अपने विचारों को समझना और नियमित रूप से ध्यान एवं साधना का अभ्यास करना जीवन को अधिक सहज बनाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयोगों के माध्यम से अपनाया जा सकता है। विचारों पर ध्यान देना, व्यवहार में संयम रखना, प्रतिक्रियाओं को समझना और स्वयं के प्रति जागरूक रहना जैसे छोटे प्रयास व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
वर्कशॉप में प्रतिभागियों को ध्यान से जुड़े विभिन्न सूक्ष्म प्रयोग भी करवाए गए। इन प्रयोगों के माध्यम से मन की एकाग्रता, आत्म-जागरूकता और भीतर की शांति को अनुभव करने का प्रयास किया गया। प्रतिभागियों ने इन प्रयोगों में रुचि के साथ भाग लिया और अध्यात्म को व्यावहारिक जीवन से जोडऩे के तरीकों को समझा। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया गया। समणी निर्वाणप्रज्ञाजी एवं समणी चैतन्यप्रज्ञाजी ने सरल उदाहरणों के माध्यम से जिज्ञासाओं का समाधान किया। करीब डेढ़ घंटे चली इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को नियमित ध्यान एवं अध्यात्म साधना से जुडऩे का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान अध्यात्म को व्यवहारिक जीवन से जोडऩे और उसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया गया।












