

बीकानेर, 6 अक्टूबर। साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य श्री रामलालजी म.सा. व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने बुधवार को चातुर्मास समर्पण में अपने संदेश में 3 दिसम्बर 2026 को भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा के दिन को संयम दिवस के रूप में मनाने का संदेश दिया है। उनके संदेश का प्रवचन स्थल पर देश के विभिन्न इलाकों से आए सैकड़ों की तादाद में श्रावक-श्राविकाओं संयम दिवस मनाने का पचखाण (संकल्प) लिया। उन्होंने जैन एकता के लिए मत व पंथ को भूलकर नवकार महामंत्र दिवस पर 9 अप्रेल को प्रतिवर्ष अधिकाधिक संख्या में मंत्र जाप करें।
साधुमार्गी जैन संघ के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि आचार्य व उपाध्याय प्रवर ने सभी जैन समाज को जोड़ते हुए तीन विशेष प्रेरणाएं दी। ’’नौ’’ चार जपा नवकार’’ दिवस 9 अप्रेल के दिन अधिकाधिक संख्या में नवकार महामंत्र का जाप करें। किसी सम्प्रदाय या गच्छ (तेरापंथ, स्थानकवासी, श्वेताम्बर व दिगम्बर) के साधु या साध्वीजी भगवंत के कालधर्म (निधन) की सूचना मिलने पर आदर एवं श्रद्धांजलि स्वरूप 11 बार नवंकार महामंत्र की माला फेरे।
आचार्य प्रवर ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जन्म व निर्वाण कल्याणक सभी जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं श्रद्धा, जप, तप, साधना, आराधना व प्रभु भक्ति के साथ मनाते है, लेकिन महावीर स्वामी का दीक्षा कल्याणक दिवस गौण हो जाता है। इसलिए प्रतिवर्ष भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा दिवस को पूरे संयम दिवस के रूप् में भव्य कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के द्वितीय पटधर जम्बू कुमार स्वामी की पुस्तक को नियमित पढ़ने की भी प्रेरणा दी।
मास खमण तपस्याओं की अनुमोदना
आचार्य भगवन रामलाल जी म.सा. एवं बहुश्रुत वचनाचार्य उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि व चारित्र आत्माओं के सानिध्य में छबीली घाटी के सेवा सदन में श्रीमती कनक देवी बच्छावत धर्म सहायिका साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मंत्री तथा प्रसिद्ध सुमधुर गायिका श्रीमती अलका डागा धर्म सहायिका रोहित डागा तथा साधुमार्गी जैन समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल व इंद्रा बैद की पुत्री के मास खमण (एक माह तक आहार के रूप् में केवल उबला सीमित जल का उपयोग करते हुए) की गई तपस्या की अनुमोदना ’’तपस्वी अमर रहे’’, ’’हर्ष-हर्ष,जय-जय के नारों के साथ उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने की। साधुमार्गी जैन संघ के अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि श्रीमती कनक देवी ने अट्ठाई, तेले, नौ व 15 दिन की तथा गायिका अलका डागा ने पूर्व में 3 से 30 दिन तक की तपस्याएं कर चुकी है। सभी श्रावक-श्राविकाओं ने उनके दीर्घ तपस्या की अनुमोदना तथा उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना की।
लोच में क्या सोच
छबीली घाटी के सेवा सदन ’’समर्पण’ चातुर्मास स्थल के पास नियमित हाथों से सिर के बालों के लोच’’ का कार्यक्रम चल रहा है। श्रावक कार्यक्रम के अंतर्गत काया क्लेश तप के माध्यम से कर्मों की निर्जरा करते हुए अब तक 208 से अधिक लोच करवा चुके है। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सिर के बालों का लोच करवाने वालों में युवाओं की संख्या भी अनुकरणीय है। मध्य प्रदेश से आए दो सैलून कारीगर पुरानी पद्धति से राख आदि का उपयोग करते हुए श्रावकों के बालों का लोच कर रहे है।












