



संघर्ष से पहली सरकारी ड्यूटी तक
मेरी कहानी: संघर्ष से पहली सरकारी ड्यूटी तक
मेरा नाम किशना राम मेघवाल है, गाँव छत्तरगढ़ का निवासी हूँ और वर्तमान में बीकानेर में रहता हूँ। आज जब मैं राजस्थान होमगार्ड की वर्दी पहनकर अपनी पहली सरकारी ड्यूटी पर खड़ा हूँ, तो यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, आंसुओं और अटूट हौसले की जीत है।
बचपन में ही ज़मीन विवाद के दौरान पिता का साया उठ गया और कुछ ही समय बाद भीषण गर्मी में तड़पकर माँ भी चल बसीं। चार छोटे भाइयों के सिर से माता-पिता का हाथ उठ चुका था। गरीबी, जातिगत दंश और पेट की भूख मिटाने के लिए मैंने 4-5 साल की उम्र में ही दूसरों की गाय-बकरियाँ चराना शुरू कर दिया।
जिंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कृष्णा जी (बुआ जी), जिनके प्रयासों से हमें बीकानेर के अनाथ आश्रम में आसरा मिला। वहीं रहकर सरकारी स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। स्काउट-गाइड में गोपाल परीक सर जैसे गुरुजनों ने आगे बढ़ाया।
18 वर्ष की उम्र में आश्रम छोड़ते ही असली परीक्षा शुरू हुई। हाथ में हुनर के लिए मैंने ITI इलेक्ट्रिशियन में दाखिला लिया। फीस भरने के लिए अस्तबल में घोड़ों की देखभाल की, मजदूरी की, पुट्टी-पेंट का काम किया और ₹1,000 के कमरे से अपनी स्वतंत्र गृहस्थी शुरू की। दिन में पढ़ाई और रात में मजदूरी व गार्ड की नौकरी करते हुए न सिर्फ खुद ITI पूरी की, बल्कि छोटे भाई को पॉलीटेक्निक डिप्लोमा करवाया और बाद में उसे ई-मित्र स्थापित करके अपने पैरों पर खड़ा किया।
ATM पर रात-रात भर गार्ड की ड्यूटी करते हुए भी मैंने पढ़ाई और आगे बढ़ने का सपना कभी नहीं छोड़ा। 2023 में राजस्थान शहरी होमगार्ड का फॉर्म भरा। कड़ी धूप, रात की ड्यूटी और दिन की थकावट के बीच दौड़ का अभ्यास किया। फिजिकल, मेडिकल और कठिन ट्रेनिंग—जिसमें पहली बार राइफल पकड़कर सटीक निशाने लगाए—सब कुछ पार करते हुए आख़िरकार मेरिट में जगह बनाई।
शनिवार के दिन जब खाटू श्याम जी और शनि महाराज के मंदिर के पास खाकी वर्दी पहनकर पहली सरकारी ड्यूटी पर खड़ा हुआ, तो आँखों में बचपन की भूख, मजदूरी और संघर्ष तैर गए।
यह मुकाम माँ करणी, खाटू श्याम बाबा के आशीर्वाद, मेरे दिवंगत माता-पिता की दुआओं और उन सभी भले लोगों के सहयोग का परिणाम है जिन्होंने मुश्किल वक्त में मेरा हाथ थामा। यह वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, मेरे आत्मसम्मान और कभी हार न मानने की सबसे बड़ी जीत है।













