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नोखा में 100 कुण्डीय महायज्ञ और श्रीमद् देवी भागवत कथा में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

कथा व्यास डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज का आह्वान—हर घर-परिवार अंशदान देकर बने आयोजन का हिस्सा

नोखा। धर्मनगरी नोखा में आयोजित भव्य चातुर्मास महोत्सव एवं दिव्य धार्मिक अनुष्ठान के तहत श्रीमद् देवी भागवत कथा, 100 कुण्डीय अयुतचंडी महायज्ञ और काशी की तर्ज पर हो रही महाआरती श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। राजकीय बाबा छोटूनाथ विद्यालय परिसर में विकसित मणिद्वीप महातीर्थ क्षेत्र में आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण, यज्ञ में आहुति, यज्ञशाला की परिक्रमा और महाआरती के दर्शन कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संत परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में पिछले ढाई माह से चल रहे इस महोत्सव के अंतर्गत 11 अक्टूबर को भव्य मंगल कलश यात्रा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष क्रम शुरू हुआ। आयोजन स्थल पर निर्मित विशाल पांडाल में अंतरराष्ट्रीय संत डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज अपनी मधुर वाणी में श्रद्धालुओं को श्रीमद् देवी भागवत कथा का रसपान करवा रहे हैं। कथा के दौरान आचार्य आदर्श महाराज, वृंदावन, व्यासपीठ के समीप बैठकर श्रीमद् देवी भागवत का मूल पाठ कर रहे हैं।

हर घर-परिवार अंशदान देकर बने सहभागी : डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज

कथा के दौरान डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नोखा में हो रहे इस भव्य धार्मिक आयोजन में प्रत्येक घर-परिवार को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अंशदान देकर सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि नोखा नगरी और नोखा तहसील चातुर्मास सत्संग समिति धन्यवाद की पात्र है, जो करोड़ों रुपये की लागत से इतने बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करवा रही है।

महाराज ने कहा कि किसी एक व्यक्ति द्वारा भी आयोजन करवाया जा सकता है, लेकिन जब कोई धार्मिक अनुष्ठान सार्वजनिक रूप से सभी के सहयोग से संपन्न होता है, तो उसमें हर व्यक्ति की सहभागिता का विशेष महत्व होता है। इसलिए प्रत्येक सनातनी भाई-बहन को चाहे एक रुपया ही क्यों न हो, अपनी यथाशक्ति अंशदान देकर इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए। इससे व्यक्ति को धार्मिक कार्य में सहयोग करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में मधुर वाणी अपनाने, अच्छे आचार-विचार रखने और सद्कर्म करने की प्रेरणा दी। महाराज ने कहा कि व्यक्ति अपने व्यवहार और विचारों को श्रेष्ठ बनाए तथा अच्छे कार्य करता रहे, क्योंकि अच्छे कर्मों का परिणाम भी अच्छा ही होता है।

देवी भागवत कथा में सुनाए विभिन्न प्रसंग

कथा के चौथे दिन बुधवार को डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज ने श्रद्धालुओं को देवी भागवत के प्रसंगों के माध्यम से धर्म, आचरण और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। उन्होंने प्रातः उठकर अपनी हथेलियों के दर्शन करने की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि हथेलियों के अग्रभाग अर्थात अंगुलियों में लक्ष्मी और मध्य भाग में सरस्वती का वास माना गया है।

कथा के दौरान द्वितीय स्कंद से संबंधित विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। इसमें स्त्रियों के तपोबल, वेदव्यास, महाभीष्म, अष्टवसुओं द्वारा गाय चुराने का प्रसंग, राजा शांतनु का विवाह, धृतराष्ट्र और गांधारी, कुंती, विदुर, पांडु महाराज, अश्विनी कुमारों तथा मंत्रों की शक्ति से जुड़े प्रसंग शामिल रहे। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण करते रहे।

100 कुण्डीय महायज्ञ में 251 विद्वान आचार्य दे रहे आहुतियां

मणिद्वीप महातीर्थ क्षेत्र में 150 गुणा 150 फुट क्षेत्रफल में विशाल 100 कुण्डीय महायज्ञशाला का निर्माण किया गया है। यहां देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 251 विद्वान आचार्य एवं ऋत्विज वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ अनुष्ठान संपन्न करवा रहे हैं।

यज्ञ में प्रतिदिन सुबह 8 से 11 बजे और शाम 3 से 6 बजे तक आहुतियां दी जा रही हैं। आयोजकों के अनुसार इस धार्मिक अनुष्ठान में एक करोड़ आहुतियां देने और 10 हजार दुर्गा सप्तशती पाठ संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है। यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के बीच श्रद्धालु भी दर्शन कर रहे हैं तथा परिक्रमा लगाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

यज्ञशाला की 108 परिक्रमा लगाने के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

आयोजन स्थल पर निर्मित विशाल यज्ञशाला की परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है। प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक हजारों नर-नारी श्रद्धालु 108 अथवा अपनी सामर्थ्य के अनुसार परिक्रमा लगा रहे हैं।

108 परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु अपने हाथ में 108 मनकों वाली माला रखते हैं और एक-एक मनका छोड़ते हुए परिक्रमा की गिनती करते हैं। इससे परिक्रमा का क्रम बनाए रखने में उन्हें सहायता मिलती है। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज, परम पूज्य कथावाचक डॉ. यशपाल चैतन्य महाराज और ब्रह्मचारी जी महाराज भी यज्ञशाला की परिक्रमा कर रहे हैं।

काशी की तर्ज पर महाआरती बनी आकर्षण का केंद्र

मणिद्वीप महातीर्थ क्षेत्र में यज्ञशाला के समीप प्रतिदिन शाम 6:30 से 7:15 बजे तक काशी की तर्ज पर महाआरती आयोजित की जा रही है। महाआरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सैकड़ों दीपों की रोशनी, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाली आरती से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।

महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं को भव्य धार्मिक दृश्य के दर्शन होते हैं। महिला, पुरुषों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कर रहे हैं। आयोजन स्थल पर महाआरती प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।

हर शाम भंडारा, दिनभर निशुल्क चाय की व्यवस्था

आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं और श्रमिकों की सुविधा के लिए प्रतिदिन शाम को भंडारे की व्यवस्था की जा रही है। भंडारे में हर दिन अलग-अलग प्रकार के पकवान तैयार किए जाते हैं। भोजन को परिसर में बनाए गए अस्थायी मंदिरों में भगवान गणेशजी, मां भगवती तथा यज्ञशाला में यज्ञनारायणजी को भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं और श्रमिकों को प्रसाद के रूप में परोसा जाता है।

इसके साथ ही पूरे दिन सभी के लिए निशुल्क चाय की व्यवस्था भी की गई है। आयोजन में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के लिए व्यवस्थाएं लगातार संचालित की जा रही हैं।

देवताओं की सजीव झांकियों के दर्शन

यज्ञशाला के समीप नवनिर्मित कुटिया में विभिन्न देवी-देवताओं की सजीव झांकियां सजाई गई हैं। श्रद्धालु इन झांकियों के दर्शन कर रहे हैं। धार्मिक वातावरण के बीच सजी झांकियां बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

वहीं, लोटस डेरी कंपनी की ओर से कथा के दौरान श्रद्धालुओं को निशुल्क शीतल छाछ के पाउच वितरित किए गए। इससे आयोजन में आने वाले लोगों को गर्मी और थकान के बीच राहत मिली।

समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता संभाल रहे व्यवस्थाएं

नोखा तहसील चातुर्मास सत्संग समिति की ओर से आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। आयोजन समिति के प्रहलाद मोहता, गिरधारी पारीक, दामोदर तिवाड़ी, नारायण राठी और पवन चांडक ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान में एक करोड़ आहुतियां और 10 हजार दुर्गा सप्तशती पाठ का लक्ष्य रखा गया है।

बृज मोहन डागा, जुगल लोहीया, मेघराज लाहोटी, राजू बाहेती, ओमप्रकाश तिवाड़ी, रामेश्वर छीपा, गोपाल मोहता और सुनील भट्टर सहित अनेक कार्यकर्ता व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। समिति की मीडिया प्रभारी इन्दू चन्द मोदी ने प्रेस नोट जारी कर आयोजन की जानकारी दी।

नोखा में चल रहा यह चातुर्मास महोत्सव धार्मिक आस्था, वैदिक अनुष्ठान, कथा श्रवण और जनसहभागिता का व्यापक उदाहरण बन रहा है। कथा व्यास डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार अंशदान देकर इस सार्वजनिक धार्मिक आयोजन में सहभागी बनें।

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Gordhan Soni

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