

बीकानेर 19 जून 2023 अमर शहीद श्री जगराम राजपुरोहित की पुण्यतिथि जूनागढ़ स्थित स्मारक स्थल पर हवन माल्यार्पण पूजा अर्चना कर बीकानेर वासियों सहित राजपुरोहित समाज के गणमान्य लोगों द्वारा संपन्न किया!
जूनागढ़ फोर्ट स्थित बीकानेर के रियासत कालीत सेनापति वीर जगराम जी ने 263 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर उनकी स्मृति में विद्वान पडित सोहन महाराज व सत्य नारायण उपाध्याय से इनकी समाधि स्थल (छतरी) के सम्मुख हवन पूजन करवाया गया। राजपुरोहित कुल के शिरोमणि वीर जगराम जी के जीवन व उनके महान बलिदान के बारे में समाज के युवाओं को अवगत करवाया गया। समाज की महिलाओं, पुरुषों तथा युवकों ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। सर्व श्री नवल किशोर, दुर्गादत गुमान सिंह, नरेश सिंह वंशराज सिंह, गोवर्धन सिंह, उम्मेद सिंह, महेश सिंह, सुरेन्द्रसिंह, सभी देशलसर व रासीसर के बजरंग सिंह, सुमेर सिंह, बद्री सिंह, गंगा सिंह रामगोपाल आदि में आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। श्रवण सिंह , अमर सिंह, रूप सिंह मादा, सुरेंद्र सिंह मादा, अजय सिंह देसलसर, सुरजाराम बापेऊंन, बच्चन सिंह देवलसर ओम सिंह हियादेसर व राजपुरोहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिक महिला पुरुष बच्चे पुष्पांजलि कार्यक्रम में उपस्थित रहे!
हवन पूजा पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद समाज के गणमान्य नागरिकों द्वारा आगन्तुक समाज की महिलाओं के बच्चों का भोजन प्रसाद करवाने में प्रक्रिय भूमिका निभाई। भवानी सिंह घेनडी – किशोर सिंह देसलसर ने प्रेस मीडिया आयोजक, युवा व बच्चों का उत्साह वर्धन किया तथा जुनागढ़ के प्रबन्धक गण व ट्रस्टीगन को उसके सहयोग के लिए सन्यवाद ज्ञापित कर उसका आभार प्रकट किया। शहीद सेनापति जगराम राजपुरोहित की पुष्पांजलि कार्यक्रम के आयोजन विशेष सहयोगी चंद्रशेखर राजपुरोहित पुत्र श्री बाबूलाल राजपुरोहित (छोटू) व उनकी पूरी टीम को सुरेंद्र सिंह मादा व भवानी सिंह द्वारा विशेष आभार व्यक्त करते हुए उनकी कार्य की प्रशंसा की !
इतिहास….
जगराम जी का जन्म बीकानेर के पास गांव देसलसर में सम्वत् 1775 में हुआ था । पिता हरनाथ सिंह जी बड़े बहादुर व्यक्ति होने के साथ-साथ अच्छे घुड़सवार थे । इस कारण अच्छे घोड़े रखने में उनकी विशेष रूचि थी । एक बार बादशाह ने उन्हे घोड़े पर सवारी करते हुए देखा तो बादशाह को उनका घोड़ा पसन्द आ गया। हरनाथ सिंह जी ने तत्काल घोड़ा बादशाह को नजर कर दिया और उसकी एवज में बादशाह ने हरनाथ सिंह जी को देसलसर गांव और अपने प्रधान सलाहकारो में नियुक्त कर फौज में बड़ा ओहदा दिया । अपने पिता के पद चिन्हों पर चलने के कारण जगराम जी बीकानेर रियासत के सेनापति रहे । इस वीर ने मात्र 12 वर्ष की युवावस्था में ही ऐसा रण कौशल दिखाया जो इतिहास के पन्नों में अंकित होकर अमिट ही नहीं बना बल्कि त्याग और बलिदान की याद दिलाने के लिए उनकी छत्री आज भी बीकानेर दुर्ग में मौजूद है। बीकानेर का झंडा ऊंचा रखने में अनेक वीर अपना रण कौशल दिखाकर शहीद हुए लेकिन दुर्ग में स्मारक केवल इसी वीर (जगराम जी) का निर्मित हुआ अन्य का नहीं ।
इस स्मारक और उनके रण कौशल पर राजपुरोहित समाज को आज भी नाज है। जगराम जी की एक छत्री देसलसर गांव में भी प्रतिष्ठित है














