
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा महोत्सव वैसे तो अपने आप में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन बीकानेर में इसके आयोजन का इतिहास भी अपने आप में अनूठा है। चाहे पुतलों के निर्माण की बात हो, या सचेतन झांकियों की, एक ही परिवार की पीढ़ियां इसका निर्वहन करती आ रही हैं। दूसरी और अगर शाही रावण की बात करें तो उसका किरदार भी एक ही परिवार द्वारा पीढ़ियों से अदा किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के बागपत से पधारे सलीम खान इस बात को बड़े फख्र के साथ बताते हैं कि वो अपने परिवार की पांचवी पीढ़ी हैं, जो इस पुतला निर्माण के कार्य में लगी हुई हैं। बीकानेर के विषय में भी उन्होंने बताया कि डॉ करणी सिंह स्टेडियम में पिछले 20 वर्षों से उनके और उनकी टीम के द्वारा ही इस कार्य को किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरा लगातार यह प्रयास रहता है कि जनता को कुछ नया कुछ अनूठा देखने को मिले।

इस वर्ष भी रावण की गर्दन को 360 डिग्री घूमने का प्रोग्राम था लेकिन तेज हवाओं को देखते हुए इसे रोकना पड़ा। उन्होंने कहा कि गर्दन को घुमाने के लिए उसे बांधा नहीं जा सकता ऐसे में यदि तेज हवा के झोंके ने गर्दन को उड़ा दिया तो बड़ा हादसा होने की सम्भावना रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा की रावण की आँखों से जो अंगारे बरसाए जाएंगे, गर्दन को घुमाने से उनके भी पब्लिक तक पहुँचने के आसार रहते। इसलिए गर्दन नहीं घुमाई जाएगी। उन्होंने कहा की पिछले वर्ष की तुलना में रावण का आकर बढ़ाया गया है। इस बार रावण का पुतल 80 फ़ीट तथा कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले 70-70 फ़ीट के होंगे।

वहीं अगर शाही रावण के किरदार की बात करें को एक ही परिवार की तीसरी पीढ़ी के कुमार आहूजा पिछले 25 वर्षों से इस किरदार को निभाते आ रहे हैं। सम्भवना है कि इस वर्ष भी यही परम्परा बरक़रार रहेगी।

आपको बता दें कि इस वर्ष दशहरा महोत्सव का आयोजन 24 अक्टूबर को किया जाएगा। इसे लेकर तैयारियां परवान पर हैं। स्टेडियम में रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले आकर लेने लगे हैं।
बीकानेर में दशहरा महोत्सव की शुरुवात करने वाले झाम्ब परिवार के संजय झाम्ब के अनुसार उनके दादा खण्डाराम झाम्ब और उनके साथियों द्वारा बीकानेर में इस आयोजन की शुरुवात स्थानीय रेलवे ग्राउंड से की गई थी। उनके अनुसार बीकानेर के तत्कालीन महाराजा डॉ करणी सिंह, उनके इस आयोजन को देखने के लिए आया करते थे। उन्होंने बताया की स्वयं डॉ करणी सिंह ने उनके दादा जी को इस आयोजन को स्टेडियम में करने का प्रस्ताव और अनुमति प्रदान की थी। उस समय के स्टेडियम का ही बाद में नाम बदलकर डॉ करणी सिंह स्टेडियम किया गया है। जिसमे आज तक इस परम्परा का निर्वहन झाम्ब परिवार द्वारा किया जा रहा है।

बीकानेर दशहरा कमेटी के महासचिव संजय झाम्ब ने अपनी कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए अपने आने वाली पीढ़ियों को ऐसे आयोजनों की जिम्मेदारी प्रदान करने की अपील करते हुए जानकारी दी कि इस वर्ष की सचेतन झांकियों के आयोजन की जिम्मेदारी मेरे सुपुत्र नमन झाम्ब को दी गई है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार यदि हम आने वाली पीढ़ियों को ऐसे आयोजन की प्रेरणा और जिम्मेदारी प्रदान करेंगे तभी हम अपनी कला और संस्कृति को जीवित रखने में सक्षम होंगे।
आयोजन की सफलता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के सफल आयोजन के पीछे हमारी पूरी टीम, प्रशासन, पड़ौसी और समस्त नगर वासियों का योगदान होता है। इस सबके सहयोग से ही हम लगातार इस आयोजन को अंजाम देने में सफल होते हैं।
उन्होंने बताया कि बीकानेर दशहरा कमेटी की पूरी टीम अध्यक्ष सुनीत झाम्ब, उपाध्यक्ष कबीर झाम्ब, महासचिव मैं संजय झाम्ब, सचिव वीरेन्द्र चावला, कोषाध्यक्ष मुकेश धुरीआ, सहसचिव जितेश अरोड़ा और नरेश झाम्ब, हमारी ड्रेसिंग टीम प्रेम सिंह, ओम प्रकाश मोदी, बजरंग मोदी, राहुल, गिरिराज रामावत, संदीप भाटी और झांकी आयोजक टीम प्रभारी नमन झाम्ब, फ्रैंकी झाम्ब और नैतिक चावला के साथ-साथ सबसे सर्वोपरि हमारे पास-पड़ौस के निवासी हमारे मुस्लिम भाई सबके सहयोग और लगभग डेढ़ माह की मेहनत से प्रत्येक वर्ष ये आयोजन किया जाता है।
उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं सबसे ज्यादा शुक्रगुजार हूं हमारे मुस्लिम भाइयों का। वर्षों से जब भी स्थानीय धोबी तलाई स्थित मंदिर में हमारी टीम इस महोत्सव की तैयारियों को अंजाम देने में जुटती है तो, हमारे चाय, पानी, नाश्ता और खाने तक का ध्यान हमारे इन मुस्लिम भाइयों द्वारा रखा जाता है। सेवा, समर्पण और सद्भाव की ये एक अनूठी मिसाल है।
इस बार के नए आकर्षण के बारे में बताते हुए संजय झाम्ब ने बताया की सबसे बड़ा आकर्षण तो इस बार प्रशासन की स्वयं की एक झांकी होगी जिसके माध्यम आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सबसे मतदान की अपील की जाएगी। साथ ही लक्की फायरवर्क्स के द्वारा इस बार डिजिटल आतिशबाजी का नजारा बीकानेर की पब्लिक को देखने को मिलेगा। यह आतिशबाजी झांकी के पूरे रस्ते में की जाएगी। साथ ही स्टेडियम में भी इस बार प्रशासन के निर्देशानुसार ग्रीन पटाखों की ही आतिशबाजी के नज़ारे देखने को मिलेंगे।
कलाकारों का चयन आज
संजय झाम्ब ने जानकारी देते हुए बताया कि सचेतन झांकियों के लिए कलाकारों का चयन आज शाम 6 बजे तनेजा धर्मशाला, गली नंबर 3, धोबी तलाई में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी इस में भाग लेना चाहता है वो आज शाम को निर्धारित समय पर आ सकता है।








