
!! दीपमाला !!
काव्य पाठ……… मोहन भन्साली
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं!
अष्ट सिद्धि, नौ निधि को मनाएं!!
घोर अंधेरी रात को, दीप जगाएं,
हम ऋधि सिद्धि के अधिष्ठाता को घर लाएं।।
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं!…….
घर घर खुशियां पहुंचाएं,
गरीब बच्चों को महकाएं,
बगिया में प्रेम का फूल खिलाएं,
हम सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को पुष्ट बनाएं।।
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं!…….
श्रीराम नाम का गुणगान गाएं,
धनासेठ कुबेर का आसन लगाएं,
मां लक्ष्मी का कुंकुम पगलिया सजाएं,
हम अमावस्या को, समृद्धि की रात बनाएं।।
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं!…….
सहानुभूति का पाठ पढ़ाएं,
मैंत्री की अखंड ज्योत जलाएं,
ऋषि मुनियों की संस्कृति अपनाएं,
हम सफलता के शिखर पर शीर्ष चढ़ाएं।।
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं!…….
कषाय मिटाएं, अनुकंपा जगाएं,
चिन्मय! राक्षसी प्रवृत्तियों को मिटाएं,
अहंकार रहित पगडंडी पर बढ़ते जाएं,
हम भगवान महावीर निर्वाणोत्सव मनाएं।।
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं!…….
हम दीपमाला बनकर जगमगाएं।।
।।ऊं अर्हंम्।।
!!दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!!
रचनाकार::
मोहनलाल भन्साली “कलाकार”
गंगाशहर, बीकानेर, राजस्थान!
दिनांक:: 22.10.2024
मो. 7734968551















