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स्वाध्याय, धर्म व जप-तप का मार्ग दिखाना गुरु का कर्तव्य : साध्वीश्री जिनबालाजी

बीकानेर। आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री जिनबालाजी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन भीनासर के प्रांगण में मंगल भावना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। तेरापंथ सभा के मंत्री चैनप्रकाश गोलछा ने अपने उद्बोधन में कहा कि विगत सात माह से साध्वीवृंदों की प्रेरणा से भीनासर के श्रावक-श्राविकाओं को स्वाध्याय और आत्मचिंतन का अवसर मिला। साध्वीश्री जिनबालाजी ने कहा कि गुरुजन व साध्वीवृंदों का प्रयास रहता है कि वे गृहस्थी को स्वाध्याय के साथ ही धर्म, जप, तप और व्रतीमार्ग की ओर प्रशस्त करे। साध्वीश्री ने कहा कि इस योग क्षेम वर्ष में कम से कम 1 महीने की सेवा गुरुदेव की सान्निध्य में करनी है और सभी से ख़मतख़ामना किए। इस अवसर पर साध्वी करूणाप्रभाजी, भव्यप्रभाजी, प्राचीप्रभाजी ने अपने विचार एक गीतिका के माध्यम से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में तेरापंथी सभा, महिला मंडल, कन्या मंडल, युवक परिषद सभी की सहभागिता रही।

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Gordhan Soni

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