Bikaner Live

रुक्मिणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णनबीकानेर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर

-रुक्मिणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णनबीकानेर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर बंगला नगर स्थित सतु महाराज की कोटड़ी, KSR ट्रेडिंग कम्पनी परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत रसामृत आनन्ददायिनी कथा के अंतर्गत आज कथा के छठे दिवस भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह तथा सुदामा चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया।कथा प्रवक्ता पंडित अभय चन्द्र व्यास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न दिव्य विवाहों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना, भक्तों के कल्याण तथा अधर्म के विनाश हेतु आठ प्रमुख रानियों के साथ विवाह किया। विशेष रूप से रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ द्वारका ले गए। यह प्रसंग सच्चे प्रेम, श्रद्धा और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है।कथावाचक ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए आदर्श है। निर्धन ब्राह्मण सुदामा जब अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे तो भगवान ने स्वयं दौड़कर उनका स्वागत किया, उन्हें अपने सिंहासन पर बैठाया तथा उनके चरण धोकर मित्रता और प्रेम की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की। भगवान ने सुदामा के लाए हुए साधारण चिवड़े को बड़े प्रेम से ग्रहण किया और बिना मांगे ही उनके समस्त कष्टों का निवारण कर दिया। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान भक्त के प्रेम के भूखे होते हैं, वस्तुओं के नहीं।कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का रसपान कर भाव-विभोर हो उठे। आयोजनकर्ता सांवरिया सेठ समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।प्रेषक:-

Picture of daulalkalla

daulalkalla

खबर

http://

Related Post

error: Content is protected !!