
बीकानेर, 26 जुलाई। श्रीकृष्णा गौशाला संस्थान, पलाना (बीकानेर) में रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गायत्री हवन का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गौभक्तों, महिलाओं एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विश्व कल्याण, गौमाता की सुख-समृद्धि, राष्ट्र की उन्नति, पर्यावरण संरक्षण तथा समस्त प्राणीमात्र के मंगल की कामना से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं।
गायत्री हवन का संचालन जगजीत जी एवं पवन कुमार ओझा ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ कराया। यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने पूर्ण आस्था के साथ सहभागिता निभाई। वैदिक परंपरा में गायत्री हवन को आत्मशुद्धि, वातावरण की पवित्रता एवं सकारात्मक ऊर्जा का श्रेष्ठ माध्यम बताया गया।
इस अवसर पर महेंद्र जोशी ने गौ-आधारित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गोबर से गोबर गणेश, गो-काष्ठ (हवन हेतु गोबर की लकड़ियां), गोबर की ईंटें, स्वास्तिक सहित विभिन्न धार्मिक एवं उपयोगी सामग्री बनाने की विधि सिखाई। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सूर्य प्रकाश जी ने गौधन अर्क के लाभ, उसके निर्माण की प्रक्रिया तथा उसके पारंपरिक एवं आयुर्वेदिक उपयोगों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ आयुर्वेदिक एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में गौधन अर्क का उपयोग कैंसर सहित विभिन्न रोगों के उपचार में सहायक के रूप में किया जाता है। साथ ही उन्होंने गोबर से यज्ञ कंडे एवं प्राकृतिक धूप बनाने का प्रशिक्षण भी दिया तथा उनके धार्मिक, पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में डॉ. सोनाली सक्सेना ने महिलाओं को संबोधित करते हुए उनके स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन एवं पारिवारिक जीवन से जुड़े विषयों पर प्रेरणादायक उद्बोधन दिया। उन्होंने महिलाओं की विभिन्न समस्याओं के समाधान में गायत्री मंत्र जाप की आध्यात्मिक शक्ति एवं सकारात्मक प्रभाव का विस्तार से वर्णन करते हुए नियमित साधना एवं मंत्र जाप के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कौशल शेखावत, अविनाश गोयल एवं राधेश्याम नामा का विशेष सहयोग रहा। वहीं ग्रामवासी पन्नालाल, रामलाल एवं परतराम सहित अन्य ग्रामीणों ने आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक, सामाजिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह पुण्य यज्ञ सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य एवं समृद्धि का संचार करे तथा गौसेवा, वैदिक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का यह पावन अभियान निरंतर आगे बढ़ता रहे।
“यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म।”
जय गोविंद • जय गोपाल • जय गौ माता • जय माँ करणी।












