गौ सेवा केवल धर्म नहीं, संस्कृति की रक्षा का भी माध्यम:- बजरंगदास जी महाराज
नोखा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री बालाजी सेवा धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य व दिव्य आयोजन किया जा रहा हे। श्री बालाजी सेवा धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आध्यात्मिक वातावरण दिन-प्रतिदिन भक्तिमय होता जा रहा है। कथा के पंचम दिवस पर अनंत श्री विभूषित महामण्डलेश्वर श्री बालाजी सेवा धाम पीठाधीश्वर आचार्य श्री बजरंगदास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक श्रवण कराया।
महाराज श्री ने कथा के दौरान राजा परीक्षित के जन्म, उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, श्राप प्राप्त होने तथा परम ज्ञानी श्री शुकदेव जी महाराज के आगमन का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य को अपने जीवन की नश्वरता का बोध होता है, तभी वह ईश्वर की शरण में जाकर भक्ति और मोक्ष का मार्ग अपनाता है। राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी का संवाद मानव जीवन को धर्म, भक्ति और वैराग्य की ओर प्रेरित करने वाला अमूल्य संदेश है।
प्रवचन के दौरान महाराज श्री ने गौ माता की महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में गौ माता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के पालन-पोषण का आधार और देवतुल्य स्वरूप माना गया है। शास्त्रों में गौ माता को सर्वदेवमयी बताया गया है तथा उनके शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास माना गया है। उन्होंने कहा कि गौ सेवा, गौ संरक्षण और गौ संवर्धन से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। जिस घर और समाज में गौ माता का सम्मान होता है, वहां सदैव सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और ईश्वर की कृपा बनी रहती है। वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह गौ रक्षा और गौ सेवा के कार्यों में अपनी भागीदारी निभाए, क्योंकि गौ सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मानवता की रक्षा का भी माध्यम है।
महाराज श्री ने योग के महत्व पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली दिव्य साधना है। नियमित योग करने से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रहता है तथा जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
आयोजन समिति के पुखराज सांखी ने कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर झूम उठे। पूरा कथा पांडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” बालाजी सेवा धाम की जय के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म, भक्ति, गौ सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर अनेक संत-महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ। नोखा, बीकानेर, नागौर सहित मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, धर्मप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक कथा में उपस्थित रहे। कथा के अंत में महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण, गौ संरक्षण, राष्ट्र की उन्नति और मानव समाज के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।















