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विद्यालयों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर, डाइट बीकानेर में साइबर सुरक्षा कार्यशाला आयोजित


साइबर एम्बेसडर पल्लब मुखर्जी ने प्रधानाचार्यों को साइबर हाइजीन, डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन खतरों से बचाव के बताए उपाय; प्रश्नोत्तरी के विजेता 10 प्रधानाचार्य पुरस्कृत

बीकानेर, 22 अगस्त। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), बीकानेर में शनिवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का विषय ‘साइबर सुरक्षा नेतृत्वकर्ता के रूप में विद्यालय प्रधानाचार्य: विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना’ रहा।

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में साइबर सुरक्षा जागरूकता, साइबर हाइजीन, विद्यालयी डेटा की सुरक्षा और साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य प्रधानाचार्यों को विद्यालय स्तर पर सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने और साइबर खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना था।

डिजिटल शिक्षा के साथ बढ़ीं साइबर सुरक्षा की चुनौतियां

कार्यशाला में बताया गया कि 21वीं सदी में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल कक्षाएं, ऑनलाइन शिक्षण मंच, स्मार्ट बोर्ड, क्लाउड आधारित प्रबंधन प्रणालियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण उपकरण अब विद्यालयी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इन तकनीकों ने शिक्षा को अधिक प्रभावी, सुलभ और रोचक बनाया है, लेकिन इनके साथ साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियां भी सामने आई हैं।

विद्यालयों के पास विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का विवरण, परीक्षा संबंधी अभिलेख, वित्तीय दस्तावेज और प्रशासनिक डेटा सुरक्षित रहता है। उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर यह संवेदनशील डेटा साइबर अपराधियों का लक्ष्य बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानाचार्यों को विद्यालय स्तर पर मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने के उपाय बताए गए।

केस स्टडी के माध्यम से समझाए साइबर खतरे

भारत सरकार द्वारा प्रशिक्षित साइबर एम्बेसडर पल्लब मुखर्जी ने संभागियों को विद्यालयों में साइबर सुरक्षा संस्कृति का निर्माण करने, स्पष्ट साइबर सुरक्षा नीतियां बनाने एवं उन्हें लागू करने, डिजिटल गतिविधियों की नियमित निगरानी एवं समीक्षा करने तथा संभावित साइबर खतरों की पहचान करने के संबंध में जानकारी दी।

उन्होंने स्मार्ट बोर्ड पर उदाहरणों और केस स्टडी के माध्यम से मजबूत पासवर्ड नीति, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, संदिग्ध लिंक और ई-मेल की पहचान, फिशिंग, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया सुरक्षा तथा विद्यालयी डेटा के सुरक्षित संग्रहण के बारे में विस्तार से समझाया। इसके साथ ही किसी साइबर घटना की स्थिति में समय पर रिपोर्ट करने और आवश्यक सावधानियां अपनाने की प्रक्रिया भी बताई गई।

प्रधानाचार्य बनें साइबर सुरक्षा के नेतृत्वकर्ता

डाइट के प्रधानाचार्य प्रवीण कुमार खत्री ने कहा कि सुरक्षित विद्यालय वही है, जहां शिक्षा के साथ डिजिटल सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है। विद्यालय प्रधानाचार्य यदि साइबर सुरक्षा नेतृत्वकर्ता की भूमिका प्रभावी ढंग से निभाएं, तो वे विद्यार्थियों और कर्मचारियों को वर्तमान साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के साथ जिम्मेदार डिजिटल नागरिकों का निर्माण भी कर सकते हैं।

उन्होंने प्रधानाचार्यों से विद्यालयों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए समय-समय पर साइबर जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यशाला में लगभग 50 प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। सभी संभागियों ने साइबर ठगी से सतर्क रहने, विद्यालयी डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का संकल्प लिया। इस दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 प्रधानाचार्यों को पुरस्कृत भी किया गया।

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Gordhan Soni

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