





भीनासर के श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के लगभग 500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक जैन मंदिर मैं पर्यूषण महापर्व पर लगातार 11 वर्षों से कोचर मंदिरात और पंचायती ट्रस्ट के तत्वाधान मैं होने वाली भक्ति की इस वर्ष की भक्ति का आज आखरी दिन है | ज्ञात रहे पूरे भारत वर्ष मैं इस आयोजन की चर्चा लगभग हर शहर हर जैनी के मुंह पर है , आयोजन से जुड़े अशोक कोचर और राहुल दफ्तरी ने बताया कि ऐतिहासिक बात ये है कि प्रभु पार्श्वनाथ की यहां स्थापित प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष प्राचीन है और यहां विराजमान अधिष्ठायक देव श्री मणिभद्र वीर की मान्यता पूरे राजस्थान के जैन समाज के लोगों मैं तो है ही पर भीनासर के दूसरे समाज के लोगों मैं भी इतनी ही है | भीनासर के इस जैन मंदिर मैं वर्ष मैं 2 मेले भरते है , भादवा सुदी पूनम और ऐतिहासिक पौष बदी दसम को जिसमें पूरे बीकानेर के जैन समाज के लोग सम्मिलित होते है | अभी चल रही भक्ति मैं बीकानेर के वरिष्ठ गायक कलाकार विनोद जी सेठिया ,सुनील जी पारख के साथ युवा गायक अरिहंत नाहटा और रौनक कोचर जैन भजनो का ऐसा शमा बाँधते है कि पूरा प्रांगण भक्ति रस मैं झूम उठता है,रोज की भक्ति हैं जहाँ 600/700 भक्त सम्मिलित होते है वही अंतिम दिन ये संख्या 1200/1300 तक हो जाती है | गंगाशहर भीनासर के साथ साथ बीकानेर नाल उदासर उदरामसर के श्रावक श्राविका इस भक्ति मैं सम्मिलित होते है, आज अंतिम दिन की भक्ति रात 8 बजे से 10/30 बजे तक चलेगी
















