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रावण के अन्त के साथ ही युद्धकांड पूर्ण हुआ। मनुष्य की इच्छा रूपी खोपड़ी कभी नही भर सकती- दंडी स्वामी  ब्रहानन्द सरस्वती



नोखा । यहाँ लाहोटी चौक में 29 जुलाई से चल रही श्री वाल्मीकि रामायण कथा के 47वें दिन रविवार को व्यासपीठ पर विराजित दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज ने युद्ध कांड की संपन्नता की ओर बढ़ाते हुए कहा कि रावण के सभी विधर्मी एक-एक करके जा रहे हैं। बड़े-बड़े धुरंधर योद्धाओं के मरने के बाद रावण को बहुत चिंता हुई। ब्रह्माजी सहित सभी रावण से डरते थे। रावण ने महोदर से कहा कि ‘अब मुझे तुम पर विश्वास है, युद्ध करो और इन्हें मारो’। महोदर ने सुग्रीव जी को बाणों से मारने लगे, लेकिन सुग्रीव जी ने महोदर को मार दिया।
सभी महारथियों के मारे जाने के बाद अब रावण अकेला रह गया, फिर भी रावण ने घोषणा की कि ‘अब मैं राम रूपी वृक्ष को उखाड़ कर फेंक दूंगा’। रावण और राम का आमना सामना हुआ। रावण बड़ी-बड़ी डींगें हांकता हुआ राम से कहता है कि ‘मैंने यह किया, वो किया, तुमने क्या किया? किसी वीर योद्धाओं को मारा है, क्या तेरी भुजाओं में इतनी ताकत है? तो आ मेरे साथ मुकाबला कर’। राम और रावण का युद्ध चला। एक बारगी तो रावण डर कर मैदान छोड़कर भाग गया। पुनः बाणों से युद्ध हुआ और भगवान राम ने रावण को मार दिया। रावण के अन्त के साथ ही युद्ध कांड संपूर्ण हुआ। कथा के मध्य में महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य का पेट भर सकता है, लेकिन इसकी खोपड़ी नहीं भर सकती। मनुष्य का भिक्षा पात्र भर सकता है, लेकिन इच्छा पात्र कभी नहीं भर सकता। अर्थात मनुष्य की इच्छाओं का कोई अंत नहीं है—चाहे वह कितना ही अरबपति, खरबपति बन जाए, लेकिन इच्छा रूपी खोपड़ी कभी नहीं भरती। आज महाराज ने कन्याओं की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस घर में कन्या नहीं, तो वो कभी नाना-नानी नहीं बन सकते। इसे विस्तार से प्रकाश डालते हुए कन्याओं के जीवन, कार्यकलापों और भावनाओं पर प्रकाश डाला। महाराज ने सोमवार को गणेश चतुर्थी कार्यक्रम के बारे में भी प्रकाश डाला। आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी इन्द्रचन्द मोदी ने प्रेस नोट जारी करके बताया कि कथा की आरती के बाद हर रोज प्रसाद वितरण किया जाता है। कथा की व्यवस्थाओं पर प्रहलाद मोहता, दामोदर तिवारी, गिरधारी पारीक, नारायण राठी, पवन चांडक, जुगल लोहिया, रमेश मालानी आदि नजर रख रहे हैं।

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Gordhan Soni

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