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तुलसी  साधना केन्द्र बीकानेर तेरापंथी सभा के तत्वाधान में
शासन श्री मंजुप्रभाजी के सान्निध्य में महापर्व का छठा दिन जप दिवस के रूप में मनाया


भगवान महावीर की जीवन यात्रा व मां त्रिशला के चौदह
महा स्वप्न के बारे में साध्वी मंजु प्रभा जी ने बतायाकि जब देवानंदा के गर्भ में बंयासी दिन बीते तब सौधर्म देवलोक के इन्द्र का आसन कंपायमान हुआ । इन्द ने हरीणगमेषी देव को बुलाया और देव ने देवानंदा का गर्भ को हरण किया और त्रिशला देवी के गर्भ में रखा। यह दस आश्चर्य में एक आश्चर्य है। तीर्थकर भगवान का गर्भ संहरण नहीं होता लेकिन भगवान महावीर का हुआ हुआ । दस माश्चर्य ठाणं सूत्र में बताये गये है उनमें पांच भगवान महावीर के साथ जुड़े हुये हैं।

साध्वी गुरुयशा जी ने  आगम वाणी के आधार पर बताया कि, शलाका पुरुष त्रिसठ बताये गये है। उनमें तीर्थकर की मां चक्रवर्ती की मां 14 महास्वप्न देखती है। वासुदेव-प्रतीवासुदेव की माता ये-सात स्वप्न देखती है और बलदेव की माता चार स्वप्न देखती है. स्वप्न विज्ञान के आधार पर जीवन विकास की यात्रा में स्वप्न का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। कुछ स्वप्न शुभ फलदायक होते है

तो कुछ स्वप्न अशुभ फलदायक भी होते है। सुखविपाक सूत्र में उन पुण्यशाली आत्माओं के सुखमय जीवन का वर्णन बताया गया है।

साध्वी जयंतप्रभा जी ने जप के बारे में बताया कि जप कैसे करें, क्यों करें, कहाँ करें । नमस्कार महामंत्र जिसमें 14 पूर्वो का सार है।. इस महामंत्र का कोई साधक अपने जीवन में आठ करोड़ आठ लाख आठ हजार, आठ सौ आठ बार यदि पूर्ण मनोयोग, से जाप करता है तो शास्त्रों के अनुसार तीसरे भव में मुक्ति बतायी गई है.

इस महापर्व की धर्माराधना में  श्रावक -श्राविका समाज साधना रत है।सामायिक व मौन  साधकों ने पंचरंगी करके अपने कर्मों की महान निर्जरा की है।  पर्युषण महापर्व की आराधना में तपस्या का क्रम भी जारी है.

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Gordhan Soni

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