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अणुव्रत उद्‌बोधन सप्ताह के अंतिम दिन छात्राओं को दी नैतिक शिक्षा, दायित्वों की जानकारी

अणुव्रत समिति नोखा के तत्वाधान में जीवन विज्ञान दिवस के रूप में स्कूल में मनाया गया

नोखा।अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा उद्घोषित एवं अणुविभा द्वारा निर्देशित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को अणुव्रत समिति नोखा के तत्वाधान में जीवन विज्ञान दिवस के रूप में
चाचा नेहरु स्कूल में मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी पुलकित यशा ने कहा कि
सुखी जीवन का पहला सूत्र है निरोग तन, निरोग मन के बिना निरोग तन संभव नहीं है ।जीवन विज्ञान मन ओर तन के समन्वय के द्वारा उत्तम स्वास्थ्य की कामना को साकार करता है।जीवन विज्ञान व्यक्ति के शारीरिक, बोद्धिक,मानसिक और भावनात्मक विकास में सहयोगी है।सम्यक् दिनचर्या ओर खान पान को,व आसन ,प्राणायाम को भी जीवन विज्ञान की श्रेणी मे ही माना गया है।जीवन विज्ञान की शिक्षा में बोद्धिक के अलावा शारीरिक प्रशिक्षण भी जरूरी है।आज स्कूली शिक्षा में जीवन विज्ञान को एक विषय के रूप मे शामिल करने की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता है । साध्वी श्री ने छात्राओं को बताया कि आपको आगे चलकर दो परिवार चलाने हैं इसलिए आपको हमेशा स्वस्थ रहना है ।उन्होंने पांच प्रकार के संकल्प बताएं। जिसे जीवन में अपनाने पर जीवन सफल हो जाता है। उन्होंने बताया कि शरीर मन से जुड़ा हुआ है, और जो कार्य मन कहता है वही शरीर करता हैं ।हमारा मन स्वस्थ होगा तो शरीर भी स्वस्थ होगा। हमेशा हर किसी के साथ सामंजस्य बनाकर चलने से ही हम सफल हो सकते हैं। सहन करने पर सफल होंगे। मुस्कान की शक्ति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाग्य के भरोसे हम नहीं रह सकते, जब तक आप पुरुषार्थ नहीं करोगे तब तक सफल नहीं होंगे। लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब आप पुरुषार्थ करोगे। साध्वी विधि प्रभा मैं कहा कि अणुव्रत संस्कार निर्माण का अभियान है ।छोटे-छोटे उपायों से व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। विद्यार्जन के लिए स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, और स्वस्थ भाव का होना आवश्यक है। जीवन विज्ञान के प्रयोग तीनों स्तर पर विद्यार्थियों को एकाग्रता को बढ़ाते हैं। विद्यार्जन की प्रक्रिया को प्रभावित बनाते हैं। और विद्यार्थियों के संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि आज मानव दानव बना हुआ है आवश्यकता है मानव को मानव बनने की। साध्वी श्री ने बताया कि शरीर में तेरह केंद्र होते हैं उनको हमेशा एक्टिव रखने चाहिए। प्रेक्षा ध्यान, जीवन विज्ञान पर विस्तार से विचार रखें। उन्होंने आह्वान किया कि नोखा क्षेत्र की विद्यालयों में जीवन विज्ञान का कोर्स चलाया जाना चाहिए। और समिति द्वारा समय-समय पर विद्यालयों में पहुंचकर जीवन विज्ञान के बारे में जानकारी देनी चाहिए। साधु श्री ने कहा कि अगर किसी में अवगुण है तो उससे भी छुड़ाने का कार्य हमको करना चाहिए आपके प्रयास से अगर एक भी व्यक्ति का जीवन सफल होता है तो उसका लाभ आपको भी मिलता है।विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज पांडे ने आभार व्यक्त करते हुए घोषणा की की विद्यालय में अणुव्रत गीत छात्रों से करवाया जाएगा। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी ने प्रधानाचार्य को अणुवत के 11 नियमों का बोर्ड भी सोपा। संचालन लाभचंद छाजेड़ ने किया। यह थे उपस्थित… इंदरचंद मोदी, इंदरचंद बैद, हंसराज भुरा, मनोज घीया, महावीर नाहटा , मनोज रांका, अनिल जैन, सुरेश बोथरा, ऋतिक बुच्चा, कुसुम छाजेड़, सुमन मालू, मोनिका भुरा ,मधु लुणिया,

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Gordhan Soni

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