
*गिरधारी लालजी पुत्र स्व.श्री मोतीलाल जी सोनी (कुकरा) का 29 अप्रैल 2024 को अकस्मात हो गया निधन,एक जमाने में थे घोड़ा पालक*
*आज 30 अप्रैल 2024 को स्वर्णकार समाज बगीची में सैकडो़ स्वर्णकार समाज के लोगों की उपस्थित में हुआ अंतिम संस्कार*
30 अप्रैल 2024 बीकानेर,गिरधारीलाल जी पुत्र स्वर्गीय श्री मोतीलाल जी सोनी कुकरा का लग-भग75 वर्ष की उम्र में 29 अप्रैल 2024 को अकस्मात निधन हो गया। आज 30 अप्रैल 2024 को इनके निज निवास स्थान माखन भोग के पास बंगला नगर से शव यात्रा निकली जो वेध मघाराम कॉलोनी स्थित मेड़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के मोक्ष धाम बगीची में पहुंची यहां स्वर्गीय श्री गिरधारी लाल जी की देह पंचतत्व में विलीन हुई। शव यात्रा में बीकानेर एवं बीकानेर के आस-पास रहने वाले स्वर्णकार समाज व सगे संबंधियों सहित सैकड़ो लोगों ने शव-यात्रा में कंधा देकर अपनी भागीदारी निभाई। स्वर्गीय गिरधारीलाल जी अपने पीछे बेटे पोते एवं पड़पोतो सहित हरा भरा परिवार छोड़ गए हैं। स्वर्गीय गिरधारी लाल जी को गोपालन का काफी लंबे समय तक शौख रहा, निरंतर वह काफी लंबे समय से गौ सेवा के ही कार्य से जुड़े रहे। गोवंश में होने वाली बीमारियों को भी वह समझ कर निशुल्क लोगों को इलाज बताया करते थे। कौन सी गाय किस नस्ल कि है वह देखते ही बता दिया करते थे। हर आम व्यक्ति को वह हमेशा अपने घर के लिए राठी गाय पालने का ही सलाह दिया करते थे और लोग उनकी कही बातों के अनुसार इनके अनुभव से गाय खरीदने से लेकर लालन पालन भी करते थे। कहीं ना कहीं गिरधारीलाल जी ने बीकानेर में गो वंश की खरीदारी में हो रही धोखाधड़ी को लोगों को बचाया। बीकानेर में गोवंश खरीदने एवं बेचने के लिए एक मंडी लगती है वार तिथि के अनुसार,जिसमें आज भी वाकायदा नियम है की कोई भी व्यापारी अपनी गाय को धोखाधड़ी के साथ नहीं बैच सकता इसका श्रेय गौ सेवक गिरधारीलाल जी सोनी को ही जाता है। आज भी बीकानेर के गो-पालक एवं बाहर के व्यापारी गिरधारीलाल जी को भली भांति रूप से जानते हैं। जीवन के अंतिम समय गिरधारी लाल जी ने मंडी का कार्य छोड़ दिया और फिर वह अपना जीवन यापन घर परिवार में पोतो एवं पड़़पोतो के साथ ही बिताते थे और कुछ समय घर परिवार के सामाजिक कार्यों में भी जाकर बीताया करते थे।
*घोड़े को आयुर्वेदिक नुक्से देकर किस प्रकार तैयार किया जाता था बड़े अच्छे निपुण सालोतर थे गिरधारी लाल जी*
आप सभी को ज्ञात है की बीकानेर ही नहीं हर शहरों में आने-जाने के साधन मोटर वाहन नही हुआ करते थे,थे तो केवल घोड़ा-तांगा। आज से 5-6 दशक पहले गिरधारी लाल जी एवं गिरधारी लाल जी के पिता स्वर्गीय मोतीलाल जी जिन्होंने अच्छी-अच्छी नस्ल के घोड़े एवं मादा घोड़ियां खरीदी। कुछ घोड़ियां शादी-विवाह के लिए रखते थे और कुछ घोड़ी और घोड़ियां उस वक्त तांगे में भी काम लेते थे। आवागमन का साधन एकमात्र तांगा ही था तांगों को चलाने के लिए रोज की दिहाड़ी के अनुसार आदमी भी रखें। घोड़े की पीठ सवारी में गिरधारी लाल जी आज से 50 वर्ष पूर्व इतने निपुण हो गए की वह बदमाश से बदमाश घोड़े को भी कुछ दिनों में ही काबू कर लेते थे।
*बीकानेर में जब हुआ करती थी घोड़ा तांगा रेस*
उस वक्त गिरधारी लाल जी के घोड़े भी कई दफे विजय श्री को प्राप्त हुए। समय के साथ-साथ घोड़े तांगों का प्रचलन कम होता गया और घोड़े तांगे की जगह मोटर वाहन आदि चलने लगे उस वक्त ही गिरधारी लाल जी ने इस व्यवसाय को अलविदा कह दिया। बढ़ती आयु के साथ गौ सेवा में लगे और गौ सेवा में भी निपुणता के साथ अपना जीवन यापन किया। आज भी बीकानेर एवं आस-पास के क्षेत्र में गाय एवं घोड़े के पीछे गिरधारीलाल जी का नाम मशहूर है। बीकानेर मैं ख्याति प्राप्त चौधरी साहब के घोड़े जिनको भी बड़े विश्वास के साथ गिरधारी लाल जी को ही सोंपे जाते रहे। यह बात उस वक्त की है जब गिरधारी लाल की उम्र 60 के करीब थी,जीवन के आखरी पड़ाव में सिर्फ और सिर्फ चौधरी साहबके ही घोड़े को संभाला था,चौधरी साहब को ही बड़ा विश्वास था गिरधारी लाल जी पर।
*गिरधारी लाल जी के वह किस्से जो कहानी बनकर रह गए,कभी भूल नहीं पाएगा उनको समाज एवं परिवार*
जीवन के उनके बहुतसे ऐसे कीस्से हैं जो आज यादगार बने हुए हैं। घर परिवार के लिए दुखद घड़ी में हर किसी के यहां पहुंचना कोई सीखे तो गिरधारी लाल जी से सीखें। दूसरों के दुख दर्द को अपना समझकर वह किसी भी प्रकार दूर करने का हमेशा प्रयास करते रहे। बहुत से ऐसे किस्से हैं जहां वह अपने तीन छोटे भाइयों सहित ऐसी ऐसी जगह पहुंच गए जहां जान का भी खतरा रहा लेकिन फिर भी सहयोग व अपनों की तकलीफों को मिटाने के लिए कभी भी पीछे नहीं हटे। ऐसी महान शख्सियत स्वर्णकार समाज एवं परिवार को मिली, धन्य है यह समाज एवं परिवार जिसमें गिरधारीलाल जी जैसे मानव हुए। हमारा न्यूज़ चैनल समूह हृदय से स्वर्गीय गिरधारी लाल जी कुकरा को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता है।














