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श्री अनेकान्त विहार का हुआ लोकार्पण, 76 जरुरतमंदों को मात्र 10 रुपए प्रतिमाह में मिलेगा आसरा,जीवनभर की साधना, तप, दान-पुण्य और परमात्मा के दर्शन से भी उच्च है साधर्मिक साधना : श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज

श्री अनेकान्त विहार का हुआ लोकार्पण, 76 जरुरतमंदों को मात्र 10 रुपए प्रतिमाह में मिलेगा आसरा

जीवनभर की साधना, तप, दान-पुण्य और परमात्मा के दर्शन से भी उच्च है साधर्मिक साधना : श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज

बीकानेर। पग-पग वंदन और अभिनंदन का घोष, बैंडबाजे की धुन के साथ उदासर में परम पूज्य गच्छाधिपति पद्मश्री विभूषित आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी महाराज आदि ठाणा का पावन आगमन हुआ। 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी महाराज की पावन निश्रा में उदासर में ग्राम पंचायत रोड स्थित श्री अनेकान्त विहार का लोकार्पण किया गया। श्री जनमंगल फाउंडेशन के सुशील बैद ने स्वागत उद्बोधन देते हुए बताया कि लोकार्पण समारोह की शुरुआत गुरु वंदन से की गई तथा थव थुई मंगलम की अलका डागा टीम व रौनक कोचर द्वारा भजन की प्रस्तुति दी गई। लोकार्पण समारोह में श्रद्धालुओं को मंगलवाणी देते हुए आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी महाराज ने कहा कि एक पलड़े में जीवनभर की साधना, आराधना, तप, दान-पुण्य रख दो और दूसरे पलड़े में मात्र साधर्मिक भक्ति रख दो, दोनों बराबर होंगे। भगवान महावीर कहते हैं साधर्मिक भक्ति का शासन में बहुत महत्व है। आंखों से किए गए परमात्मा के दर्शन तब तक सार्थक नहीं होंगे जब तक आप साधर्मिक के दुख दूर नहीं कर देते। परमात्मा उस पूजा को कभी स्वीकार नहीं करेंगे जो हाथ दु:ख के दरिए में डूबते हो उबार नहीं देते। तीर्थयात्राएं तब तक सार्थक नहीं हो सकती जब तक आप साधर्मिक को दु:ख से उबार न दो। रोते हुए चेहरों को हंसाने वाला ही इंसान होता है। जीवन वही है जो पतझड़ में बसंत ला दे, मुरझाए हुए फूलों को खिला दे। इससे पूर्व कार्यक्रम में श्री अनेकान्त विहार के आर्किटेक्ट अर्पित अभाणी का अतिथियों द्वारा अभिनंदन किया गया। मुनिश्री मोक्षानन्दजी महाराज ने भी मंगल उद्बोधन दिया। विकास सिरोहिया ने बताया कि कार्यक्रम में विधायक जेठानन्द व्यास, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के टेकचन्द बरडिय़ा, विभाग प्रचारक विनायक शर्मा, राष्ट्रीय मानवाधिकार से उमेश शर्मा, शिवरतन अग्रवाल, यूआईटी के पूर्व चैयरमेन महावीर रांका, समाजसेवी बसंत नौलखा, जेठमल सुराना, लोटस डेयरी के अशोक मोदी, जयचन्दलाल डागा, वल्लभ कोचर, भाजपा नेता मोहन सुराना, पवन महनोत, पवन बोथरा, चम्पालाल बोथरा, नरेन्द्र सुराना एवं कुनाल कोचर का आतिथ्य रहा। अतिथियों का आभार एवं धन्यवाद गणेशमल बोथरा द्वारा ज्ञापित किया गया।

हर तीन वर्ष में होगा पुन: रजिस्ट्रेशन
समाज समृद्ध हो और जरुरतमंद की मदद हो इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु श्री जनमंगल फाउंडेशन, बीकानेर द्वारा मुनिश्री अनेकान्त विजयश्री महाराज की स्मृति में एवं स्व. केसरीचन्द कोचर (मकडज़ी), स्व. लालचन्द सुराणा, स्व. राजेन्द्र प्रसाद कोचर की प्रेरणा से श्री अनेकान्त विहार का निर्माण किया गया है। श्री जनमंगल फाउंडेशन के विमल कोचर एवं विनोद दस्साणी ने बताया कि पांच हजार गज से अधिक भूमि पर बने इस अनेकान्त विहार में 76 फ्लेट 1 बीचके एवं 2 बीएचके का निर्माण किया गया है तथा जैन समाज के जरुरतमंद परिवार को यह फ्लेट निवास हेतु दिए जाएंगे। सुशील बैद एवं विकास सिरोहिया ने बताया कि विगत करीब चार वर्षों की अवधि में बने इस श्री अनेकान्त विहार में जैन समाज के जरुरतमंद वर्ग को तीन वर्ष की अवधि के लिए यह फ्लेट मात्र 10 रुपए प्रति माह टोकन के रूप में दिया जाएगा, ताकि समाज की सम्पत्ति का अधिकार श्री जनमंगल फाउंडेशन ट्रस्ट के पास ही रहे। तीन वर्ष के बाद यदि वह परिवार अन्य स्थान पर स्वयं का मकान बनाने में सक्षम नहीं होता है तो पुन: रजिस्ट्रेशन करवा कर तीन वर्ष तक निवास कर सकता है। यह प्रकल्प समाज के लोगों के लिए समाज के लोगों द्वारा ही सम्पन्न किया जा रहा है। जेठमल सुराना व राहुल कोचर ने बताया कि निर्माण कार्य से पहले आचार्यश्री जयानन्दजी सूरीश्वर जी महाराज की निश्रा में तथा सिरोही निवासी मनोज भाई हरण के सान्निध्य में शिलान्यास किया गया था। विगत 58 वर्षों से समाजसेवा में जुटे हुए समाजरत्न जेठमल सुराणा के मार्गदर्शन में यह प्रकल्प शुरू हुआ। गौरतलब है कि श्री अनेकान्त जी महाराज के संसारपक्षीय तीनों सुपुत्र आचार्यश्री जयानन्दसूरीश्वर जी महाराज, गच्छाधिपति धर्मधुरंधरसूरिश्वर जी महाराज एवं गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी महाराज संत साधना के उच्चतम शिखर पर विराजित हैं। गच्छाधिपति धर्मधुरंधरसूरिश्वर जी महाराज एवं आचार्य श्री पीयूषसागर जी महाराज के चरणकमलों से यह भूमि पावन हो चुकी है।

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Prakash Samsukha

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