Bikaner Live

श्री राम कथा अमृतोत्सव के समापन पर राम राज्यअभिषेक में प्रभु भक्ति का सैलाब उमड़ा

नानी बाई रो मायरे की कथा आज से
बीकानेर, 24 मई। जस्सूसर गेट क्षेत्र के सीताराम भवन में चल रहे श्रीराम कथा अमृतोत्सव के समापन पर रविवार को राम राज्य अभिषेक के साथ हुआ। राम राज्य अभिषेक के समय प्रभु भक्ति के गीतों, नृत्यों की धूम रही। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के साथ स्वर मिलाकर प्रभु भक्ति के सैलाब का दिग्दर्शन करवा दिया।  सोमवार से सीताराम भवन में ही अपरान्ह साढ़े तीन बजे से शाम सात बजे तक संगीतमय ’’नानी बाई के मायरे’’ की कथा होगी। कथा का वांचन विवेचन वृंदावन के पंडित देवेश दीक्षित महाराज करेंगे।
कथा वाचक पंडित पुरुषोतम व्यास ’’मीमांसक’’ ने अनेक भक्ति गीतों के मुखड़े तथा मानस की चौपाइयों को सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने और उनके भव्य राज्याभिषेक की कथा व प्रसंग सनातन धर्म में अत्यन्त पवित्र व मंगलकारी है। रामराज्य, आदर्श शासन व्यवस्था का प्रतीक व प्रेरणादायक प्रसंग है। प्रभु श्रीराम रावण वध कर माता सीता को मुक्त करावाकर पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचे तो पूरे नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। भाई भरत, जो पिछले 14 वर्षों से नंदीग्राम में तपस्वी का जीवन व्यतीत कर रहे थे, श्रीरामजी की चरण पादुका रखकर राज्य चला रहे थे, प्रभु से मिलकर भावुक हो गए। अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया। गुरु वशिष्ट और अन्य ़ऋषियों के मार्ग दर्शन में राज्याअभिषेक हुआ। प्रभु श्रीराम को रत्न जड़ित सिंहासन पर बिठाया गया तथा राम दरबार का अभिषेक व पूजन किया गया। देवराज इंद्र सहित सभी देवी देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की । सभी और मंगल ही मंगल, प्रभु भक्ति और आनंद-ही आनंद का नजारा था। ’’मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सु दसरथ  अजर बिहारी’’।
’’मीमांसकजी’’ ने कहा कि राम चरित मानस सहित सभी रामायण व शास्त्रों में बताया गया कि राम राज्य की सबसे बड़ी विशेषता यह थी की वहां किसी प्रकार का दैहिक, दैविक व भौतिक कष्ट किसी को नहीं था। सभी लोग धर्म और नीति का पालन करते हुए प्रेम से रहते तथा प्रभु का गुणगान करते थे। कथा संदेश देती है कि हमें भगवान श्री राम के चरणों की शरण लेते हुए प्रभु के काज करने चाहिए। उन्होंने ’’अवधपुरी अति रुचित बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई।, सब नर करहिं परस्पर प्रीति। चलहि स्वधर्म निरत श्रीुति नीति, सिय समेत बैठे प्रभु रामा। सकल सुमंगल सुखद निकामा। ’’मुनिन्ह सहित तब तिलक सराहा। वेद पढहिं सुरबरशहिं लाहा आदि अनेक चौपाइयां ’’ छंद ’नभ दुंदभीं बाजहिं विपुल गंधर्व किंनर गावही। नाचहिं अपछरा बृंद परमानंद सुर मुनि पावहीं।। भरतादि अनुज विभीषनांगद हनुमादादि समेत ते। गहें छत्रचामर व्यंजन धनु असिचर्म सक्ति विराजते। तथा अनेक भजन ’’राम आयेंगे तो अंगना सजाऊंगी’’ आदि को सुनाकर श्रोताओं को भक्ति सागर में एकाग्रचित होकर करीब पांच घंटें तक डुबाए रखा। अभिषेक में कथा की मुख्य लाभार्थी पुष्पा देवी धर्म पत्नी स्वर्गीय सीतारामजी सोमानी व उनके परिजनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

Picture of Gordhan Soni

Gordhan Soni

खबर

http://

Related Post

error: Content is protected !!